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अल्सर रोग का आयुर्वेदिक इलाज, alsar ka ayurvedic ilaj
alsar ka ayurvedic ilaj
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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए तथा इसके बाद प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।

अल्सर रोग का आयुर्वेदिक इलाज

अल्सर रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को नियमित अंतराल पर ठंडा दूध पीना चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले भोजन करने का समय बनाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तेजक पदार्थ, मिर्च मसालेदार भोजन, मांसाहारी पदार्थ का सेवन करना छोड़ देना चाहिए क्योंकि इन पदार्थों का सेवन करने से रोग की अवस्था और भी गम्भीर हो सकती है।

alsar ka ayurvedic ilaj

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में ठंडे पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके और कब्ज की शिकायत हो तो दूर हो सके। इस प्रकार से उपचार करने से अल्सर रोग ठीक हो जाता है।

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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट पर प्रतिदिन ठंडे कपड़े की लपेट का इस्तेमाल करना चाहिए।

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अल्सर रोग को ठीक करने के लिए गैस्ट्रो-हैपेटिक लपेट का उपयोग करना चाहिए।
पेट पर मिट्टी का लेप करने से पेट से गैस बाहर निकल जाती है जिसके परिणामस्वरूप अल्सर रोग ठीक हो जाता है।

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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन ठंडे पानी से कटि-स्नान करना चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी के पेट में अधिक जलन हो रही हो तो उसके पेट पर तुरंत बर्फ की थैली का प्रयोग करना चाहिए। इस प्रकार का उपचार करने से पेट में जलन होना तथा दर्द होना बंद हो जाता है।

alsar ke upay in hindi

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक आराम करना चाहिए तथा प्राकृतिक चिकित्सा से अपना उपचार करना चाहिए तभी यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज, asthma ka ayurvedic ilaj
asthma ka ayurvedic ilaj
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अस्थमा एक फेफड़े की बीमारी है जो साँस लेने में कठिनाई का कारण बनता है। फेफड़ों में हवा के प्रवाह में रुकावट होने पर अस्थमा अटैक होता है।

अस्थमा के कारण

एलर्जी, वायु प्रदूषण, धूम्रपान और तंबाकू, श्वसन संक्रमण, जेनेटिक्स (आनुवांशिक), मौसम के कारण, मोटापा, तनाव
अस्थमा (दमा) के लक्षण
साँस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या दर्द, खाँसी, घरघराहट, लगातार सर्दी और खांसी

अस्थमा के घरेलू नुस्खे

अदरक का रस, अनार का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन करें।

asthma ke gharelu upchar

नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता हैं जो अस्थमा के इलाज में सहायक होता है। एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस निचोड़ लें और उसमें अपने स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पीयें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज

आंवला दमा के उपचार के लिए एक अच्छा उपाय है। आंवला को कुचलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और सेवन करें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक नुस्खे

तीन सूखे अंजीर को धो लें और रात भर एक कप पानी में भिगोएँ। सुबह में खाली पेट अंजीर खा लें और अंजीर का पानी पीयें।
dama khansi ka ilaj
एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रात में सोने से पहले सेवन करें। यह गले से कफ को निकालने में मदद करता है और इससे अच्छी नींद आती है।
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प्याज में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण दमा के इलाज में मदद करता है। प्याज को सलाद के रूप में या सब्जियों में पकाकर खा सकते है।
asthma ke gharelu upchar
एक गिलास गर्म दूध में जैतून का तेल और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इसमें कुछ लहसुन की कली डालकर नाश्ता करने से पहले सेवन करें।
dama khansi ka ilaj
संतरा, पपीता, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी भी अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
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पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर उबाल लें और इसका भाप लें। आप चाहे तो इसे पी भी सकते है।
अपने आहार में अधिक ताजा फल और सब्जियों को शामिल करें।

यूरिन इंफ़ेक्शन के आयुर्वेदिक इलाज, urine infection ka ayurvedic ilaj
urine infection ka ayurvedic ilaj
urine infection ka ayurvedic ilaj

यूरिन इंफ़ेक्शन का इलाज घरेलू उपाय किया जाए तो समस्या जड़ से ख़त्म हो सकती है।

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यूरिन इंफ़ेक्शन का एक कारण है, बैक्टीरिया का जमाव। ज़्यादा पानी पीते रहने से बैक्टीरिया ब्लैडर में जमा नहीं होते हैं और इंफ़ेक्शन से बचाव होता है। दर्द, जलन और सूजन जैसी समस्या से निजात मिल जाती है।

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सेब का सिरका यूटीआई की समस्या के इलाज और गुप्तांग संबंधित अनेक समस्याओं के उपचार में काफ़ी मददगार है। 1 गिलास पानी में 2 से 3 चम्मच सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस उपाय को दिन में 3 बार करने से यूटीआई से निजात मिलेगी।

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खट्टे फलों में सिट्रिक एसिड होता है जो कि बैक्टीरिया को ख़त्म करता है। पेशाब में इंफ़ेक्शन होने पर खट्टे फलों का सेवन करें और उनका रस पिएं। नींबू, संतरा और आंवला खट्टे फलों के बढ़िया उदाहरण हैं।

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नींबू पानी पीना यूटीआई की समस्या में बहुत लाभकारी होता है।
खट्टे फलों में विटामिन सी भी होता है जो एक प्रकार का एंटी ऑक्सीडेंट है। वाइटमिन सी बॉडी से फ्री रेडिकल्स को बाहर करके इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाता है। जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

urine infection ka ayurvedic treatment in hindi

बेकिंग सोडा हमारी बॉडी में एसिड का बैलेंस बनाए रखने में काफ़ी कारगर है। यूरिन ट्रैक्ट इंफ़ेक्शन के इलाज में 1 गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर दिन में 2 बार पीना चाहिए।
4. क्रैनबेरी जूस मूत्र में संक्रमण को रोकने में अच्छा उपाय है। अगर आप इसे यूं ही न पी पाएं तो सेब के जूस में मिलाकर पी सकते हैं।

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यूरिन में इंफ़ेक्शन का उपचार अन्नानास से भी किया जा सकता है। अन्नानास गुप्तांग  के बैक्टीरिया को ख़त्म करने में असरदार है। इससे आप ऐसे ही खा सकते हैं और जूस भी पी सकते हैं।

urine infection me kya khana chahiye

लस्सी या छाछ यूटीआई की समस्या होने पर ज़रूर पीनी चाहिए। ये ब्लैडर में पनप रहे बैक्टीरिया को बाहर कर देती है। इसके अलावा पेशाब में होने वाली जलन से भी राहत देती है।यूटीआई के समय दही का प्रयोग कर सकते हैं, दही खाने से शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।
ब्लैडर में इंफ़ेक्शन होने पर प्याज का सेवन भी उत्तम है, प्याज बॉडी से टॉक्सिन और फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने में मदद करता है।

सेक्स की हर समस्या का आयुर्वेदिक इलाज, Ayurvedic treatment for sexual problem in hindi
Ayurvedic treatment for sexual problem in hindi
Ayurvedic treatment for sexual problem in hindi

एक बार आजमाकर देंखे जिंदगी जीने का मजा आ जायेगा सेक्स की हर समस्या का एक ही इलाज
गुप्त रोगी इस पोस्ट को बिना पढ़े ना छोड़े, ये चूर्ण खाकर 60 साल का बूढ़ा भी कहे की अभी तो में जवान हूँ, शरीर का पूरा कायाकल्प करने वाला सदाबहार चूर्ण ज्यादा से ज्यादा शेयर करें
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दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आज हम आपको ayurveda का सबसे अचूक नुस्खा बताने जा रहे हैं, वियाग्रा टैबलेट्स hert को व gurde को तकलीफ देने वाली गोलियाँ लेने वाले भाईयो , कृपया ध्यान दें, कि आयुर्वेद मे जल्दी पतन जैसी नामुराद समस्या को भी जड़ से खत्म करने के लिये आप एक बार महारसेंद्र चूड़ामणि योग, खुद तैयार करके इस्तेमाल जरूर करके देखें। मेरा यह योग हजारों लोगों पर आजमाया हुआ योग है, यह योग इतना कारगर है की दोबारा आपको किसी और योग को अपनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी

महा चूड़ामणि योग इतना प्रभावशाली है, कि इसका सेवन करने से रोम – रोम नाचने लगता है, मस्ती से भरा हुआ मर्द जब जनानी के साथ सेज साँझी करता है, तो दोनों की रूह एक दूसरे में इस तरह समा जाती है, जैसे तुम और मैं का भेद समाप्त हो जाता है। इसके कुछ दिन उपयोग के बाद अंदरुनी पावर आ जाती है,

सेक्स समस्या का आयुर्वेदिक इलाज

महा काम चूड़ामणि का उपयोग एक दूसरे से बहुत प्यार करने वाले जोड़ों को जरूर करना चाहिए, वही इसकी सही उपयोग करके एक दूसरे के हो सकते हैं। क्योंकि संबंध प्यार को बढ़ाता है और यह आपको संबंध का राजा बना देगा I कम से कम इस को एक बार अपनी लाइफ में प्रयोग करके देखें मैं आपको निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि दोबारा आपको शर्मिंदगी का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा

★महा काम चूडामणि को अति विलासी राजे- महाराजे इस्तेमाल करते थे। क्योंकि उनके पास कई कई रानियां होती थी, इसलिए वह इसका प्रयोग करते थे, इसके 45 दिन उपयोग करने से बीज बहुत गाढा हो जाता है।और बीज की गुणवत्ता बहुत अधिक मात्रा में सुधर जाती है,इसके कुछ दिनों के इसतेमाल से नाड़ीतंत्र को ताकत मिलती है।

Ayurvedic treatment for sexual problem

नासमझी मैं बचपन में की गई गलतियों से जो भी शारीरिक मजोरी आई हुई है, उन सभी कमियों को दूर करके आपकी लिं की नसों की रिपेयर कर के और आप के मसल्स को टाइट करके आपके शिशन में में खून को दोबारा से स्टार्ट करता है जिससे की आपके यंत्र में भरपूर कड़क पन आता है, या नी आप के यंत्र पत्थर की तरह मजबूत हो जाता है, शिशन का का पतलापन, छोटापन, टेढ़ापन, पतन क्रा-णुओं की कमी वह अन्य इन सारी समस्याओं को जड़ से खत्म कर देता है

★महा चूड़ामणि का इस्तेमाल करने वाला इंसान जिस, भी जनानी के साथ एक बार संबंध बना लेता है, जीवन भर उसी की दासी बन जाती है

सेक्स समस्या का आयुर्वेदिक नुस्खे

ताकतवर समझकर कभी भी बताई गई मात्रा से जयादा इस्तेमाल न करें, कयोंकि जयादा मात्रा में सेवन करने से कामो त्तेजना बहुत बढ जाती है। चूड़ामणि का प्रमाणिक वैद्य के अनुसार बताई गई मात्रा में ही सेवन करें, ज्यादा मात्रा में सेवन करने से उत्ते जना ज्यादा हो सकती है I
काम चूड़ामणि योग बनाने की सही विधी
★ स्वर्ण भस्म 1 ग्राम।
★ नाग भस्म 300 पुटी 20 ग्राम।
★ अभ्रक भस्म 20 ग्राम।
★ वंग भस्म 15 ग्राम।
★ अतुल शकतिदाता योग (खुद तैयार किया) 40 ग्राम।
★ चाँदी भस्म 2 ग्राम।
★ स्वर्ण माक्षिक भस्म 5 ग्राम।
★ सफेद मूसली -80ग्राम
★ सालम पंजा -20ग्राम
★ सालम मिश्री -40 ग्राम
★ शुद्ध कौंच बीज -15 ग्राम
★ बीज बंद -10 ग्राम
★ अस्वगंधा -20 ग्राम
★ उंटंगन बीज -150 ग्राम
★ सालम गत्ता -30 ग्राम

Ayurvedic remedies for sexual problem

सबकोमिलाकर पीपल के पतों के रस और भंग के पतों के रस में तीन दिन खरल । फिर मघाँ, गिलोय, भड़िंगी, अंबरबेल, खस, नागरमोथा, शुद बचनाग, मुलठी, शतावर, कौंच के रस के काड़े की सात- सात भावना देवें। जब सारी जड़ी बूटियां सूख जाये तो इसके 10 gm अफीम मिलाकर तुलसी के रस में घोटकर 1-1 रती की गोली बनाकर छाया में सुखा लें I अब आप का महाशक्तिशाली रसेंद्रचूड़ामणि तैयार है

गर्मियों में ही इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें क्योंकि यह गर्मियों के लिए एक बेहतरीन तोहफा है इसका इस्तेमाल फरवरी से लेकर अगस्त तक ही करें और गुप्त समस्याओं से ग्रसित सभी समस्याओं से समाधान पाएं!

ऐसी तमाम कारण है, जिनके कारण वैवाहिक जीवन का सत्यानाश होता रहता ह? और कई बार तो साथी के कदम बहक जाने से परिवार तक टूट जाते हैं। ऐसे में पति बाजारू दवाओं का सेवन करके या नीम-हकीमों के चक्कर में अपनी मेहनत का पैसा लुटाते रहते हैं I लेकिन स्थायी समाधान हाथ नहीं आकर बस कुछ देर के लाभ का छलावा महसूस होता है, इसमें पैसा और मेहनत सब कुछ व्यर्थ हो जाता है! महा काम चूड़ामणि योग इतना कामयाब नुक्शा सिद्ध हुआ है कि इसको खाकर लोग धन्यवाद करते हैं।

आम तौर पर देखा गया है, आज के नौजवानों को शीघ्रपतन की शिकायत रहती है I और बहुत से भाई बचपन में ना समझी के कारण गलतियां कर देते हैंI जिसका खामियाजा उनको जवानी में यानी शादी के बाद उठाना पड़ता है I जो लोग बचपन में गलतियां करके अपने आप को अपने ही हाथों से बर्बाद कर चुके हैं, उनके लिये यह वरदान के रूप में है। जबकि दूसरी बाजीकरक सतंभक आयुर्वेदिक योग 70-80 दिनों बाद अपना असर दिखाना शुरू करती हैं, वहीं यह योग तुरंत प्रभाव दिखाता है, व इसका प्रभाव भी काफी समय तक रहता है। क्योंकि जो उसके अंदर जड़ी बूटियां शामिल हैं उनकी तासीर बहुत ठंडी है, तो इसलिए इसका साइड इफेक्ट का तो कोई चांस ही नहीं है, क्योंकि यह शत-प्रतिशत प्योर आयुर्वेदिक है, उच्च क्वालिटी की जड़ी बूटी होने के कारण इसका असर बहुत बहुत लंबे समय तक रहता है

★ काम चूड़ामणि का 45 दिन का उपयोग आपको स्थाई प्रभाव देता है, यानी इसका असर बहुत-बहुत समय तक रहेगा यानी इसका काम बिल्कुल सही रहेगा, चूड़ामणि से पुरानी गलतियों को सुधार सकते हैं, और नए जीवन की सफलता से शुरूआत कर सकते हैं I

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यह आपकी इंद्रियों को खोल देता है, और आपकी इंद्री को पत्थर की तरह मजबूत करता है ,और आपके बीज को मक्खन की तरह गाढ़ा कर देता है,और वैवाहिक जीवन का आनंद उठा पाओगे महा काम चूड़ामणि योग के प्रयोग के बाद आप आराम से जीवन भर 20 से 25 मिनट तक पिच पर टिक पाओगे

➡ ध्यान रहे : जब भी अगर आप इसे बनाए तो बनाते समय उच्च क्वालिटी की जड़ी बूटियों का ही उपयोग करें, जितनी ज्यादा उच्च क्वालिटी की शुद्ध जड़ी बूटियों का उपयोग करेंगे उतना ही ज्यादा फायदा आपको मिलेगा

डॉ जोशी ने गहन अध्ययन और अनुभव करके एक नुस्खा तैयार किया है जिसका नाम है” महा चूड़ामणि जो कि काम शरीर की समस्त आवश्यकताओं को पूरा कर सिर्फ़ कमजोरी दूर करता है, बल्कि अतिरिक्त काम-क्षमता ( अंदरुनी पावर) भी प्रदान करता है। आयुर्वैदिक चूंकि इन के परचारों के ऊपर लाखों रुपये दिखावा करने वाले विज्ञापनों में खर्च नहीं करता है, इसलिये लागत मूल्य में हमें बाजारू नुस्खे से अत्यंत कम दाम पर इसे तैयार करने का मौका मिलता है।

कृपया ध्यान दें इसका उपयोग डेढ़ महीने से ज्यादा ना करें क्योंकि यह बहुत ज्यादा पावरफुल जड़ी बूटियां होती है इसलिए इसका सेवन मात्र डेढ़ महीने ही करें इससे ज्यादा इसके सेवन की आपको आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी

दिल धड़कन तेज होने का कारण और आयुर्वेदिक इलाज, dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj
dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj
dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj

दिल की धड़कन तेज होना तथा अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज,

वास्तव में दिल की धड़कन कोई रोग नहीं है| किन्तु जब दिल तेजी से धड़कने लगता है तो मनुष्य के शरीर में कमजोरी आ जाती है, माथे पर हल्का पसीना उभर आता है तथा पैर लड़खड़ाने लगते हैं|
रोगी को लगता है, जैसे वह गिर जाएगा| दिल धड़कने की क्रिया भय, हानि की आशंका, परीक्षा में असफलता, ट्रेन का अचानक छूटना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि घटनाओं को देखने-सुनने के बाद शुरू हो जाती है|
यह एक प्रकार की चिन्ताजन्य घबराहट होती है जिसकी वजह से दिल बड़ी तेजी से धड़कने लगता है| यदि उसी क्षण मनुष्य मन से चिन्ता तथा भय को निकाल दे तो दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
कई बार तेज दौड़-भाग करने, देर तक व्यायाम करने या रक्तचाप की अधिकता आदि के कारण भी दिल तेजी से धड़कने लगता है| यह रोग बुढ़ापे में बहुत जल्दी लग जाता है| इसलिए इस आयु में व्यक्ति कोई सदैव प्रसन्नचित्त रहना चाहिए तथा जाने-अनजाने व्यर्थ की चिन्ताओं से दूर रहना चाहिए|

तेजी से दिल धड़कने का कारण,

dil ki dhadkan tez hone ka karan

प्रत्येक स्त्री, पुरुष और बच्चे का दिल एक निश्चित गति में धड़कता रहता है| यह धड़कन मनुष्य के स्वस्थ तथा जीवित होने का लक्षण है|

अनियमित दिल की धड़कन के लक्षण

लेकिन किसी आशंका, भय या चिन्ता के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है| यदि यह बार-बार होने लगे तो समझना चाहिए कि यह दिल की धड़कन का रोग है|

पल्स रेट बढ़ने के कारण

यह रोग प्राय: उन लोगों को बहुत जल्दी होता है जो शरीर तथा हृदय दोनों से दुर्बल होते हैं| वैसे अधिक मानसिक उत्तेजना, दुःख, कष्ट, संकट, क्षुब्धता, स्नायुमंडल का कोई रोग, उत्तेजित पदार्थों का सेवन, भय, अधिक परिश्रम, दौड़ - धूप, हस्तमैथुन, स्त्री-प्रसंग आदि कारणों से यह रोग बड़ी जल्दी हो जाता है|
तेजी से दिल धड़कने की पहचान
 रोग में कलेजा जोर-जोर से धड़कने लगता है| शरीर में कमजोरी आ जाती है| कुछ लोगों को बेचैनी भी महसूस होती है|
शरीर में शुष्कता, कंठ में खुश्की, प्यास, तन्द्रा, अजीर्ण, भूख न लगना, दिल का जैसे बैठ जाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं| हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं| शरीर की प्राणवायु शिथिल हो जाती है|
सांस लेने में कठिनाई होती है| बस खाट पर लेटे रहने की इच्छा होती है| ऐसे में प्रिय व्यक्ति से बात करना भी अच्छा नहीं लगता|

तेजी से दिल धड़कने के आयुर्वेदिक इलाज

गाय के दूध में किशमिश तथा बादाम डालकर औटाएं| फिर शक्कर डालकर सहता-सहता घूंट-घूंट पी लें|
पिस्ते की लौज खाने से हृदय की धड़कन ठीक हो जाती है|
दो चम्मच प्याज के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें|
भोजन के बाद चार चम्मच अंगूर का रस पिएं|
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें| फिर इसमें धनिया का चूर्ण समभाग में मिलाएं| एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पिएं|

dil ki dhadkan tez hone ka ayurvedic ilaj

अनार के कोमल कलियों की चटनी बनाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह के समय निहार मुंह खाएं| लगभग एक सप्ताह सेवन करने से दिल की धड़कन सही रास्ते पर आ जाती है|
बेल का गूदा लेकर उसे भून लें| फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें|

dil ki dhadkan control karne ke ayurvedic ilaj

200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें| फिर इस पानी को आंच पर रखें| जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें| यह दिल को मजबूत करता है|

dil ki dhadkan control karne ke ayurvedic nuskhe

आंवले के चूर्ण में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद खाएं| यह दिल की धड़कन सामान्य करता है| इससे रक्तचाप में भी लाभ होता है क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने पर रक्तचाप भी बढ़/घट जाता है|
पके पपीते का रस एक कप की मात्रा में भोजन के बाद सेवन करें|
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आधा कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन दोपहर के समय पिएं|
दिल धड़कने पर जरा-सा कपूर जीभ पर रखकर चूसें|
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आधे कप सेब के रस में चार कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|

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लाल इलायची के दानों को पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से चौथाई चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर खाएं|

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टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें| टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक नुस्खे
पानी में आधा नीबू निचोड़ें तथा उसमें दो चुटकी खाने वाला सोडा डालें| इस नीबू-पानी को पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज
आधा चम्मच अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक - दोनों को पीसकर गुनगुने पानी के साथ खाएं| यह चूर्ण दिल की तेज धड़कन को सामान्य बना देता है| यह एक बेहतरीन नुस्खा माना जाता है|

अनियमित दिल की धड़कन का इलाज

अदरक का रस एक चम्मच, तुलसी के पत्तों का रस चौथाई चम्मच, लहसुन का रस दो बूंद तथा सेंधा नमक एक चुटकी - सबको अच्छी तरह मिलाकर उंगली से चाटें| चाटते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेट में लार अधिक मात्रा में जाए|
अनियमित दिल की धड़कन के लिए आयुर्वेदिक इलाज
कंधारी अनार का रस कालीमिर्च के चूर्ण तथा सेंधा नमक मिलाकर लेने से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
राई पीसकर छाती पर मलने से भी दिल को काफी आराम मिलता है|

तेजी से दिल धड़कने में क्या खाएं क्या नहीं
सादा तथा सुपाच्य भोजन भूख से कम खाएं| साथ में अधिक चिकने पदार्थ न लें क्योंकि चिकनी चीजें शरीर को बल देने साथ-साथ रक्त को गाढ़ा करती हैं जो दिल धड़कने वाले रोगी के लिए हानिकारक है|

heartbeat control tips in hindi

मौसमी फल तथा मौसमी हरी सब्जियां अधिक मात्रा में सेवन करें| परन्तु ठंडी तासीर के फल तथा सब्जियां बिलकुल न खाएं| रक्तचाप की जांच कराते रहें|

heartbeat control karne ke upay

भोजन के साथ कच्ची अदरक, कच्ची प्याज तथा कच्चे चनो का इस्तेमाल अवश्य करें| अंकुरित मूंग दिल की धड़कन में बहुत लाभकारी है| मसालों में लाल मिर्च न खाकर कालीमिर्च, लौंग, जावित्री, तेजपात आदि साग-सब्जी में डालकर सेवन करें|

dil ki dhadkan tej hone par kya kare
बकरी तथा गाय का दूध अवश्य लें| बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, खजूर, चिलगोजे आदि मेवे दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखते हैं| साथ ही चिंता, शोक, निराशा एवं विषाद आदि नकारात्मक भावों से स्वयं को बचाएं|
पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज, Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj
Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj
Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक इलाज

Ginger सोंठ और बायविंडग को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की घरेलू इलाज

• बकायन और नीम के पेड़ की छाल को पीसकर पानी में डालकर लेप बनाकर पेट पर लगाने सेपेट के कीड़े मलकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
• बकायन की 20 ग्राम छाल को 2 लीटर पानी में उबालें। 750 मिलीलीटर पानी शेष रहने पर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर 3 दिनों तक 50 से 100 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज,

पारसी कयवानी बीज को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी बने चूर्ण को एक ग्राम से लेकर 5 ग्राम की मात्रा में 50-100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर एक दिन में 2 बार पेट के कीड़ों से छुटकारा मिलता है।

पेट के कीड़ो की घरेलू इलाज,

महानिम्ब के नये पत्तों को पीसकर रस निकाल लें, इसी रस को 7 मिलीलीटर से लेकर 14 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम पीने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक नुस्खे

काम्पिल्लक के फल को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण में 1 ग्राम गुड़ को मिलाकर 100 मिलीलीटर दूध को दिन में 2 बार पिलाने से लाभ होता है।
पेट के कीड़े मारने की घरेलू उपाय
खजूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर बासी होने पर शहद के साथ मिलाकर पीने से और खजूर की पत्तियों का रस 40 ग्राम और 40 ग्राम शहद के साथ मिलाकर पीने पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं।
बच्चों के पेट में कीड़े की दवा
करंज की मींगी को भूनकर 3 से 4 दिन तक खाने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े की देसी इलाज

• प्याज के 10 मिलीलीटर रस में थोड़ी-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर पिलाने से पेट के कीड़ें मिट जाते हैं।
• प्याज के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से पेट के अन्दर के चुन्ने कीड़े मर जाते हैं।

Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

• प्याज को निचोड़कर प्राप्त रस को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में पीने से बच्चों के पेट मे मौजूद कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
• प्याज का रस एक चम्मच की मात्रा में 2-2 घण्टे के अन्तराल के बाद पीने से पेट के कीड़े मरते हैं और पेट का दर्द भी दूर होता है।
• प्याज का आधा चम्मच रस 2 से 3 दिन तक बच्चों को देने से पेट के कीड़े और दर्द नष्ट होते हैं।
7 Vastu Tips To Welcome Positive Energy Into Your Home
7 Vastu Tips To Welcome Positive Energy Into Your Home
7 Vastu Tips To Welcome Positive Energy Into Your Home

1. A clean doorway to your home is very important to keep the negative energies out of your house. So, ensure that your doorway is cleaned regularly.

2. The use of wind chimes in a home keeps negative energies out of the premises. The music of the tinkling chimes helps in breaking the pattern of the negative energy and promotes the flow of positive energy.

3. Sea salt is known to be a healer. Keep a bowl of sea salt in every corner of your house to absorb all the negative energy. Also, you could keep sea salt rocks in the corners of your home

4. Placing religious idols, pictures and symbols helps keep negativity at bay.

5. Lemon in water keeps the negative energy away from your house. To ensure this is effective, change the water every Saturday.

6. Light some incense sticks, earthen lamp lights and candles every morning and evening. These act as cleansers, removing any negative energy away from the house.

7. Placing a convex mirror on the facade wall facing the exteriors can also be helpful in wiping the negative energy off.

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POWER OF YOGA Mudras
POWER OF YOGA Mudras
POWER OF YOGA Mudras


As stated above, Mudras are a powerful yogic tool for bringing the body into balance. The key to health is living in harmony with our inner nature and with Nature as a whole. Health is not an objective, but a holistic approach where body and mind are integrated with the inner self.

The answer to every query and conflict lies within us. YOGA is not only a study of the Sutras; it is the study of Self. No matter how many books you have read or how many trainings you have completed, nothing makes real sense until the teachings become experience. There are no shortcuts. Go within. Nothing has the greatest power to heal but Self.

YOGA hand Mudras

Mudra is a therapeutic modality that means a posture, or seal. Mudras are a nonverbal mode of communication and self-expression, consisting of hand gestures, finger movements, and body postures. They arouse the etheric body’s latent energy, and all of the dormant and passive nerve cells of the brain are awakened and stimulated into action. Mudras promote efficiency in the functioning of the organs and organ systems of the physical body. Time, space, and observer are the three important factors in the practice of Mudras. To derive the full benefit of Mudras, practitioners should observe physical cleanliness; eat pure static and healthy food; and practice purity of thoughts, speech, and actions. The ideal times to practice are at dawn and dusk, but one should aim to perform Mudras three times a day, holding them for 30 seconds to five minutes each time, depending on how many Mudras you are performing.

Mudras are a combination of subtle physical movements which alter mood, attitude and perception. And which deepen awareness and concentration. A Mudra may involve the whole body in a combination of Asana, Pranayama, Bandha and Visualization techniques, or it may be a simple hand position. Mudras are higher practices which lead to the awakening of the Pranas, Chakras and Kundalini. It establishes the pranic balance within the koshas and enables the redirection of subtle energy to the upper chakras inducing a higher state of consciousness. Each Mudra sets up a different link and has a corresponding different effect on the body, mind and prana.

The YOGA Mudras can be categorised into five groups depending on the body part we use for the practice.

YOGA Mudras list

These five groups are:
• Hasta (Hand Mudras)
• Mana (Head Mudras)
• Kaya (Postural Mudras)
• Bandha (Lock Mudras)
• Adhara (Perineal Mudras)

YOGA is more than just about the asanas wherein you twist your body or practice difficult asanas. There are a lot of other ancient techniques that work in the YOGA. The Sanskrit word Mudra is referred as ‘gesture’ or ‘attitude’. Mudras can be described as psychic, emotional, devotional and aesthetic gestures or attitudes. Ancient yogis had described Mudras as attitudes of energy flow, intended to link individual pranic force with universal or cosmic force.

Mudra for strong will power

The use of Mudras adjusts the flow of energy affecting the balance of air, fire, water, earth, ether and facilitate healing with the restoration of health.

Mudra for psychic powers

Diseases in our body are caused due to an imbalance in the body, which in turn is caused by lack or excess of any of the five elements - Air, Water, Fire, Earth and space. Our fingers have the characteristics of these elements and each of these five elements serves a specific and important function within the body. When a finger representing an element is brought into contact with the thumb, that element is brought into balance. Therefore, the disease caused by the imbalance is cured.
स्‍वाइन फ्लू के लक्षण और इससे बचने के घरेलू उपचार

स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है जो एच-1 एन -1 वायरस के द्वारा होता है, जिसके लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम जैसे ही होते है।  इसमें गले में खराश , नाक बहना या बंद होना , बुखार , सिरदर्द , शरीर में दर्द , ठंड लगना , पेट में दर्द , कभी-कभी दस्त व उल्टी आदि।

संक्रमित व्यक्ति के खांसने या उसे छींक आने से निकले द्रव की बूंदों से ये फैलता है।   इन्फेक्शन लगने पर एक से सात दिनों में लक्षण उत्पन्न हो जाते है। swine flu ke gharelu nuskhe अपनाने से बहुत लाभ होता है जानिये इनके बारे में।

स्वाइन फ्लू के घरेलु  नुस्खे

डेढ़ कप पानी में तीन चार तुलसी के पत्ते , चार काली मिर्च , आधा चम्मच हल्दी  पाउडर , अदरक , जीरा व थोड़ी चीनी डालकर पानी एक कप रह जाने तक उबालें फिर इसमें थोडा नींबू का रस डालकर गुनगुना सेवन करें . दिन में 2-3 बार ले सकते है।

अमृतधारा की दो बूँद रुमाल या रुई पर लगाकर  बार बार सूंघते रहें।

कपूर , इलायची व लौंग को पीसकर मिलाकर छोटी पोटली बनाकर सूंघते रहें। नाक गले और फेफड़ों को इन्फेक्शन से बचाने का उत्तम उपाय है।

तुलसी के तीन चार पत्ते रोज सुबह खाएं। तुलसी के पत्ते इन्फेक्शन से बचाते है। फेफड़ों और गले को ठीक रखने में मदद करते है।

 ताजा गिलोय का रस चार चम्मच रोज पियें। गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते है।

 गिलोय काढ़ा बनाने की विधि इस प्रकार है :-
गिलोय बेल की एक फुट लम्बी डंडी के टुकड़े और पांच तुलसी के पत्ते दो गिलास पानी में डाल कर उबालें। आधा रह जाने पर थोड़ा ठंडा हो जाये तब छान लें। इसमें सेंधा नमक और काली मिर्च डाल कर गुनगुना पी लें। दिन में एक बार लेने से इम्युनिटी बढ़ती है। बहुत फायदेमंद है।

दिन में तीन बार नाक में तिल के तेल की दो दो बूँद डाले।

ग्वारपाठा ( Aloe vera ) का गूदा एक चम्मच रोज ले। ये इम्युनिटी बढ़ाता है और जाइंट्स के दर्द में आराम दिलाता है।

आंवले का रोजाना किसी भी रूप में सेवन करें। आंवले से भरपूर विटामिन “C ” मिलता है जो आपको हर प्रकार के इन्फेक्शन से बचाता है।

अपने हाथ बार बार साबुन से अच्छे से धोएँ। विशेष कर यदि आप घर से बाहर जाकर आये हों। हाथों के माध्यम से इन्फेक्शन लगने की सम्भावना ज्यादा होती है।

इनमे से जो भी उपाय कर सकते है आपको करने चाहिए। इन swine flu ke gharelu upay  से आप अवश्य ठीक रह पाएँगे।

इन उपायों से आराम नहीं आए तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें .

सिर्फ एक रात में मुहांसो से छुटकारा


चेहरा कितना भी खूबसूरत क्‍यों ना हो अगर उसपर एक छोटा सा भी मुहांसा हो जाए तो वह पूरे चेहरे की सुंदरता को तार तार कर देता है। फिर आप जितना भी मेकप लगाकर उसे छुपाने की कोशिश करें वह बेकार ही जाता है। इसके लिए जरुरी है क‍ि आप अपने खाने-पीने पर और त्‍वचा की साफ सफाई का पूरा ध्‍यान दें।
मुहांसों को 2-3 दिनं में दूर करने के उपाय:

1 मुहांसो से छुटाकारा पाने के लिए इंहे कभी भी ना फोड़े वरना इसका सीरम निकल कर पूरे चेहरे पर मुहांसे फैला देगा। मुहासों को तौलिए से ना रगड़े, ऐसे करने से आपके पूरे चेहरे पर मुहासे फैल सकते हैं। बेहतर होगा कि इसको अपने आप ही खत्‍म होने दें।

2 चंदन का पाऊडर पिंपल भगाने में बहुत लाभकारी होता है। यह न सिर्फ आपके चेहरे को फ्रेश करेगा बल्कि पिंपल को दुबारा लौटने से भी रोकेगा। चंदन पाऊडर को पिंपल पर 2-3 घंटो के लिए लगा रहने दें और चेहरे को ठंडे पानी से धो कर सूखा लें।

3 चेहरे पर गुलाब जल लगा कर छोड़ दें इससे आपकी स्‍किन के पोर्स खुल जाएगें और चेहरा तरोताजा हो जाएगा। इसको चंदन पाऊडर के साथ मिक्‍स कर के भी पिंपल पर लगाया जा सकता है।

4 चंदन पाऊडर को मुल्‍तानी मिट्टी और गुलाब जल को 10-15 मिनट के लिए चेहरे पर लगा रहने के बाद धो लें। यह रातभर में या केवल 2-3 दिनों में ही आपके चेहरे से पिंपल को गायब कर देगा।

5 टूथपेस्‍ट तो हम दांत साफ करने के लिए प्रयोग करते हैं, पर इसके इस्‍तमाल से आप अपने चेहरे के पिंपल को भी साफ कर सकते हैं। अगर रात में सोने से पहले इसको अपने चेहरे के मुहांसे पर लगा रहने देगें तो यह उन मुहासों को ठंडा कर के सुखा देगा।

6 नींबू का रस पिंपल भगाने में सबसे कारगर उपाय है। इसके रस से अपने चेहरे की 10-15 मिनट तक मालिश करने से राहत मिलेगी। हां, अगर इसके प्रयोग से आपकी स्‍किन में जलन महसूस हो रही हो तो इसको डाइरेक्‍त ना इस्‍तमाल करें। तब इसको पानी या चंदन पाऊडर में मिला कर लगाएं।

7 लैवेंडर के तेल को चेहरे पर लगातार लगाना चाहिए जिससे पिंपल रात भर में ही गायब हो जाए। यह एक बहुत असरदार उपाय है पिंपल को दूर करने का।

8 दालचीनी और शहद को एक साथ मिला कर अपने मुहांसो पर हल्‍के हाथों से मलें। इसको एक साथ मिला कर पेस्‍ट भी तैयार कर सकती हैं और चेहरे पर लगा सकती हैं।

अगर आप को पिंपल फ्री त्‍वचा चाहिए तो इन नुस्‍खों का जरुर इस्‍तमाल करें।