Piles बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज, bawaseer ka ayurvedic ilaj

bawaseer ka ayurvedic ilaj
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दुनिया में बहुत लोग बवासीर से परेशान है । इंसान का उठना बैठना इसके कारण मुशकिल हो जाता । कई को बहुत ही असहनीय दर्द की अनुभूती होती है ।
इस रोग का कारण खट्टी तले पदार्थ ,तेज मिर्च मसालेदार वस्तुएं ,कब्ज आदि है ।

bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi me

ऐलोपेथी में इसका इलाज सिर्फ आप्रेशन है । लेकिन उसके बावजूद भी यह रोग दोबारा घेर लेता है । आखिर कितने आप्रेशन करवाए जाएं । लेकिन आपको घबराने की जरूरत नही । आयुर्वेद में इस रोग की बहुत सफल औष्धियाँ है । जो इस रोग को जड़ मूल से ठीक कर देती है । मैं आपको घरेलु नुस्खे बता रहा हुँ जिनकी मदद से आपको काफी राहत मिलेगी । अगर आपका रोग पुराना है या आप्रेशन करवा लिया है या अन्य किसी प्रकार की चिकित्सा से आराम नही हुआ तो आप बेझिझक मुझसे संपर्क कर सकते है ।

बवासीर नाशक 10 घरेलु इलाज

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50 ग्राम तिल को चबाकर खाने के बाद ऊपर से दही खा लेने से रक्तस्राव रूकता है ।

khooni bawaseer ka ayurvedic ilaj

मेथी बीज दूध में उबालकर लेने खूनी बवासीर में लाभ होता है ।

badi bawaseer ka ayurvedic ilaj

10 ग्राम ईशबगोल भुसी रात को दूध से लें । इससे दोनों बवासीर में लाभ होगा ।
पुरानी बवासीर का इलाज
एक कप मूली के रस में देशी घी मिलाकर सुबह- शाम पीएं । मूली का सलाद भी ले सकते है ।

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करेले का रस सुबह खाली पेट लें ।
खुनी बवासीर का रामबाण इलाज
नारियल की जटा जलाकर ,समभाग फिटकरी का फूला ,मिश्री मिलाकर 10 ग्राम तक नारियल के पानी या दूध पानी की लस्सी से लें ।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज

गुनगुना दूध में नीबू निचोड़ कर पीएं ।नीबू काटकर उसमें कत्था लगाकर खाएं ।

बवासीर का आयुर्वेदिक दवा

मूली को काटकर नमक लगाकर औस में रात को छत पर रख दें । सुबह खाली पेट खाएं । मूली की रस से गुदा को धोएं । बादी बवासीर के लिए भी कर सकते है ।
bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi mein
मूली के 125 एम.एल रस में 100 ग्राम देशी घी में बनी जलेबी को एक घंटा डूबो दें । फिर जलेबी खाकर रस पी लें । एक से चार हफ्ता तक करें । मूली को घी में भूनकर भी खा सकते है ।

bawaseer bimari ka ayurvedic ilaj

गेहू के जवारे का रस ,गिलोय और ग्वारपाठा का रस 20 से 50 एम.एल सुबह खाली पेट लें ।

पेट दर्द का आयुर्वेदिक इलाज pet dard ka ayurvedic ilaj

पेट दर्द का आयुर्वेदिक इलाज pet dard ka ayurvedic ilaj
पेट दर्द का आयुर्वेदिक इलाज pet dard ka ayurvedic ilaj

गलत खान पान अथवा अपच के कारण होने वाले पेट दर्द के लिए आयुर्वेद में कुछ नुस्खे बताए गये हैं ! जिनका अगर प्रयोग किया जाए तो पेट दर्द कि परेशानी से बचा जा सकता है !

Ayurvedic Ilaj Hindi Me

हालांकि इस तरह के पेट दर्द के लिए आज भी हमारे घरों में आयुर्वेदिक नुस्खे काम में लाये जाते हैं और उनसे आराम भी मिलता है !
ऐसे ही कुछ Ayurvedic Ilaj Bataye :-
1 . अदरक और लहसुन को बराबर कि मात्रा में पीसकर एक चम्मच कि मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है ! 2 . एक ग्राम काला नमक और दो ग्राम अजवायन गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है !

Ayurvedic treatment of abdominal pain

3 . अमरबेल के बीजों को पानी से पीसकर बनाए गये लेप को पेट पर लगाकर कपडे से बाँधने से गैस कि तकलीफ , डकारें आना , अपानवायु न निकलना , पेट दर्द और मरोड़ जैसे कष्ट दूर हो जाते हैं !

pet dard ka ayurvedic ilaj

4 . सौंठ , हींग और कालीमिर्च का चूर्ण बराबर कि मात्रा में मिलाकर एक चम्मच कि मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है !

stomach pain home remedies

5 . जटामांसी , सौंठ , आंवला और काला नमक बराबर कि मात्रा में पीस लें और एक एक चम्मच कि मात्रा में तीन बार लेने से भी पेट दर्द से राहत मिलती है !

Ayurvedic Ilaj For stomach pain

6 . जायफल का एक चौथाई चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से भी पेट दर्द में आराम पहुँचता है !
Ayurvedic Ilaj For abdominal pain
7 . पत्थरचट्टा के दो तीन पत्तों पर हल्का नमक लगाकर या पत्तों के एक चम्मच रस में सौंठ का चूर्ण मिलाकर खिलाने से पेट दर्द से राहत मिलती है !
8 . सफ़ेद मुसली और दालचीनी को समभाग में मिलाकर पीस लें ! एक चम्मच कि मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से 2-3 खुराक में ही पूरा आराम मिल जाता है !

प्रेगनेंसी टेस्ट करने के घरेलू उपाय pregnancy test karne ke gharelu upay

pregnancy test karne ke gharelu upay
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मित्रों आइये आज हम आपको बिल्कुल सस्ता प्रैग्नेंसी जाँच का सरल तरीका बताते हैं -

प्रेग्नेंसी जाँच के घरेलू नुख्शे

मित्रों यदि किसी को प्रेगनेंसी जाचनी हैं तो सबसे पहले एक डिस्पोजल गिलास में थोड़ा सा चीनी डालिये फिर उसमें शुबह का पहला थोड़ा सा यूरिन डालें यदि चीनी और पानी घुल जाएं तो प्रेग्नेंसी निगेटिव हैं।
यानी महिला गर्भवती नहीं है ठीक इसी प्रकार यदि चीनी घुलने की बजाय गुच्छों की तरह हो जाय तो रिजल्ट पॉजिटिव हैं। यानी महिला गर्भवती हैं।

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यह बिलकुल आसान तरीका है प्रेग्नेंसी जांच की जिसमें मात्र 50 पैसे की चीनी खर्च होगी और आप रिजल्ट जान लेंगे ।

प्रेगनेंसी चेक करने के लिए घरेलू उपाय

2 टेबलस्पून किसी भी सफेद टूथपेस्ट को यूरिन सैंपल में मिक्स करें। इसका रंग ब्लू होने पर यह प्रेगनेंसी  का संकेत होता है।
किसी भी रोग के घरेलू नुस्खे जानकारी के लिए विजिट करे ayurvedicilaj.in

बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है What is needed to create a Child born

बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है What is needed to create a Child born


पुरुष का वीर्य और औरत का गर्भ! लेकिन रुकिए ... सिर्फ गर्भ? नहीं... नहीं...!!!
एक ऐसा शरीर जो इस क्रिया के लिए तैयार हो।
जबकि वीर्य के लिए 13 साल और 70 साल का वीर्य भी चलेगा।
लेकिन गर्भाशय का मजबूत होना अति आवश्यक है, इसलिए सेहत भी अच्छी होनी चाहिए।
एक ऐसी स्त्री का गर्भाशय जिसको बाकायदा हर महीने समयानुसार माहवारी (Period) आती हो।
जी हाँ !
वही माहवारी जिसको सभी स्त्रियाँ हर महीने बर्दाश्त करती हैं।बर्दाश्त इसलिए क्योंकि महावारी (Period) उनका Choice नहीं है।
यह कुदरत के द्वारा दिया गया एक नियम है।
वही महावारी जिसमें शरीर पूरा अकड़ जाता है, कमर लगता है टूट गयी हो, पैरों की पिण्डलियाँ फटने लगती हैं, लगता है पेड़ू में किसी ने पत्थर ठूँस दिये हों, दर्द की हिलोरें सिहरन पैदा करती हैं।
ऊपर से लोगों की घटिया मानसिकता की वजह से इसको छुपा छुपा के रखना अपने आप में किसी जँग से कम नहीं।

बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है

बच्चे को जन्म देते समय असहनीय दर्द को बर्दाश्त करने के लिए मानसिक और शारीरिक दोनो रूप से तैयार हों।
बीस हड्डियाँ एक साथ टूटने जैसा दर्द सहन करने की क्षमता से परिपूर्ण हों।

गर्भवती होने के लिए क्या करना चाहिए

गर्भधारण करने के बाद शुरू के 3 से 4 महीने जबरदस्त शारीरिक और हार्मोनल बदलाव के चलते उल्टियाँ, थकान, अवसाद के लिए मानसिक रूप से तैयार हों।
5वें से 9वें महीने तक अपने बढ़े हुए पेट और शरीर के साथ सभी काम यथावत करने की शक्ति हो।
गर्भधारण के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में तरह तरह के हर दूसरे तीसरे दिन इंजेक्शन लगवानें की हिम्मत रखती हों।
प्रसव पीड़ा को दो-चार, छः घंटे के अलावा, दो दिन, तीन दिन तक बर्दाश्त कर सकने की क्षमता हो। और अगर फिर भी बच्चे का आगमन ना हो तो गर्भ को चीर कर बच्चे को बाहर निकलवाने की हिम्मत रखती हों।
गर्भ ठहरने के लिए क्या करें
अपने खूबसूरत शरीर में Stretch Marks और Operation का निशान ताउम्र अपने साथ ढोने को तैयार हों। कभी कभी प्रसव के बाद दूध कम उतरने या ना उतरने की दशा में तरह-तरह के काढ़े और दवाई पीने का साहस रखती हों।
जो अपनी नीन्द को दाँव पर लगा कर दिन और रात में कोई फर्क ना करती हो। 3 साल तक सिर्फ बच्चे के लिए ही जीने की शर्त पर गर्भधारण के लिए राजी होती हैं।

बच्चा पैदा करने के लिए क्या करना चाहिए

गर्भ में आने के बाद एक स्त्री की यही मनोदशा होती है जिसे एक पुरुष शायद ही कभी समझ पाये। औरत तो स्वयं अपने आप में एक शक्ति है, बलिदान है।
इतना कुछ सहन करतें हुए भी वह तुम्हारें अच्छे-बुरे, पसन्द-नापसन्द का ख्याल रखती है।

गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन के आयुर्वेदिक इलाज. Ayurvedic Remedies For Uterus Swelling ayurvedic

गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन के आयुर्वेदिक इलाज. Ayurvedic Remedies For Uterus Swelling ayurvedic


बच्चेदानी में सूजन के उपाय

कुछ महिलाओं ने गर्भाशय की सूजन के विषय मे पूछा है तो आइए जानते हैं गर्भाशय के सूजन के विषय में आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय

गर्भपात के बाद गर्भाशय में सूजन

गर्भाशय में सूजन से पीड़ित महिला को चटपटे मसालों-मिर्च-तली हुई चीजें और मिठाई से परहेज रखना चाहिए।

Ayurvedic Remedies For Uterus Swelling ayurvedic

पीड़ित स्त्री को दो --तीन बार अपने पैर कम से कम एक घंटे के लिए एक फुट ऊपर उठाकर लेटना चाहिए और आराम करना चाहिए

गर्भाशय (बच्चेदानी) की सूजन के आयुर्वेदिक इलाज

गर्भाशय में सूजन हो जाने पर महिला रोगी को चार-पांच दिनों तक फलों का जूस पीकर व हल्का आहार लेकर रहना चाहिए- उसके बाद बिना पका हुआ संतुलित आहार लेना चाहिए

बच्चेदानी में इन्फेक्शन के आयुर्वेदिक इलाज

निर्गुण्डी को किसी भी प्रकार के बाहरी --भीतरी सूजन के लिए एक उपयुक्त ओषधि के रूप में इसका उपयोग किया जाता है यह औषधि वेदना शामक है वैसे आयुर्वेद में सुजन उतारने वाली और भी कई औषधियों का वर्णन आता है पर निर्गुण्डी इन सब में अच्छा है और सर्वसुलभ भी-नीम,(निर्गुन्डी) सम्भालु के पत्ते और सोंठ सभी का काढ़ा बनाकर जननांग में लगाने से सुजन ख़त्म हो जाती है

बच्चेदानी की सूजन के आयुर्वेदिक इलाज

बादाम रोगन एक चम्मच, शरबत बनफ्सा तीन चम्मच और खांड पानी में मिलाकर सुबह पीयें तथा बादाम रोगन का एक रुई का फोया जननांग के मुह पर रखें-इससे गर्मी के कारण गर्भाशय में सूजन ठीक हो जाती है।
बच्चेदानी में सूजन की दवा
अरंड के पत्तों का रस छानकर रुई में भिगोकर जननांग में लगाने से भी सूजन ख़त्म हो जाती है।

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

जब महिला के पेट में बच्चा पलता है, तब उस महिला के पेट का आकर धीरे धीरे बढ़ने लगती है और स्त्री के पेट के नीचले हिस्से पर खिचाव होने लगता है. साथ ही प्रेग्नेंट लड़की की त्वचा भी पूरी खीच जाती है. इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला के जांघो पर, कूल्हे पर और सीने के हिस्से पर भी काफी ज़्यादा दबाव पड़ता है.
बच्चे का जन्म होने के बाद अपने आप ही प्रेग्नेंट लड़की के अंगो पर से खिचाव कम होता है, वैसी ही लड़की की त्वचा पहले जैसी होने लगती है. बच्चे का जन्म होने के बाद त्वचा पहले जैसी तो हो जाती है लेकिन उस महिला के पेट के नीचले हिस्से में और दोनों जांघो और कूल्हे पर स्ट्रेच मार्क्स रह जाते है.
ज्यादातर स्त्रियों को ये स्ट्रेच मार्क्स बच्चे का जन्म होने के कुछ समय बाद अपने आप ही धीरे धीरे साफ़ हो जाते है. लेकिन बहुत बार ये स्ट्रेच मार्क्स अपने आप नहीं जाते है. इसीलिए आज हम आप लोगों को कुछ ऐसे तरीके के बारे में बताने जा रहे है. जिसका इस्तेमाल करके आप आप स्ट्रेच मार्क्स के निशानों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है.

डिलीवरी के बाद पेट का कालापन कैसे दूर करे

अगर आप इस स्ट्रेच मार्क्स को मिटाना चाहती है, तो ओलिव ऑइल यानि की जैतून का तेल लीजिये और अपने स्ट्रेच मार्क्स इस जैतून के तेल से मालिश कीजिये. इस तेल से रोज़ाना मालिश करने से डिलीवरी के 30 से 45 दिन के अन्दर ही सभी स्ट्रेच मार्क्स के दाग चाले जाते है. जैतून के तेल से निशान तो जाते ही है साथ ही इससे आप प्रेग्नेंट लड़की की हड्डियों पर भी मालिश कर सकते है क्यूंकि इस तेल से हड्डियां भी मजबूत होती है.

प्रसव के बाद शरीर के कालापन दूर करने के उपाय

प्रेगनेंसी के बाद होने वाले स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए सबसे पहले आलू को मिक्सर में पीसकर आलू का रस निकाल लीजिये। आलू का रस निकालने के बाद उस रस को खिचाव वाले निशानों पर लगा लीजिये। आलू का रस लगाने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दीजिये. सूखने के बाद हलके गर्म पानी से धो लीजिये। ऐसा करने से कुछ ही महीनो में स्ट्रेच मार्क्स अपने आप ही साफ़ हो जायेंगे

डिलीवरी के बाद निकला पेट अंदर करने का उपाय

मेथी के बीज पेट कम करने में काफी मददगार होते हैं. साथ ही यह महिलाओं में हार्मोन को संतुलित रख कर पेट कम करते हैं. रात के समय में 1 चम्मच मेथी के बीजों को 1 ग्लास पानी में उबालें. पानी को हल्का गुनगुना होने पर पीएं. पेट जल्दी कम हो जाएगा.

नॉर्मल डिलीवरी के बाद पेट कम करना

बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं. एक स्टडी के मुताबिक, स्तनपान कराने से शरीर में मौजूद फैट सेल्स और कैलोरीज दोनों मिलकर दूध बनाने का का काम तरते हैं. जिससे बिना कुछ करे ही वजन कम हो जाता है.

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज wound treatment in hindi

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज, wound treatment in hindi

चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।
कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

घाव का इलाज

लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं।

घाव का आयुर्वेदिक इलाज

तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

ज़ख्म का इलाज

नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है।
घाव न भरना
संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है।
पुराने घाव का इलाज
पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।

घाव सुखाने के आयुर्वेदिक इलाज

तुलसी के पत्तों का चूर्ण भुरभुराने सेया बेल के पत्तों को पीसकर लगाने से घावजल्दी भर जाते हैं।

हिलते दांतों का आयुर्वेदिक इलाज Loose Teeth treatment in Hindi


Loose Teeth treatment

दांतों की ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडोंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइब्रस टिश्‍यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्‍यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्‍या होने लगती है। यह समस्‍या दांतों को बहुत ज्‍यादा रगड़ने, गम क्‍लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है।

हिलते दांतों का इलाज

Loose Teeth  treatment in Hindi
Loose Teeth  treatment in Hindi 


काली मिर्च और हल्‍दी का पेस्ट --
इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्‍या होने पर काली मिर्च और हल्‍दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्‍ट बनाना लें। इस पेस्‍ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्‍ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्‍या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।

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पुदीने का तेल
पुदीने के तेल में दांतों की समस्‍याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्‍टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्‍या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्‍छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्‍ला करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

Loose Teeth treatment

सरसों का तेल और नमक
प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्‍ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्‍द ही आराम मिलने लगेगा।

Home Remedies For Loose Teeth in Hindi

दांत मजबूत करने के घरेलू उपाय- आंवला

आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्‍ला कर लें या इसे पी लें।

मसूड़ों को मजबूत करने के उपाय

लौंग के तेल के प्रयोग
लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्‍तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्‍यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।

दांतों का हिलना कैसे बंद करें

अजवायन की पत्तियों का तेल
आजवाइन की पत्‍ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है।
दांतों को मजबूत बनाने के उपाय नमक का प्रयोग करें
नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्‍मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods


सर्दियों में लोगों को ठंड से बचने के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं। गर्म कपड़ों के साथ ही आपको अपने आहार पर ध्यान देना जरुरी है। कई लोगों का रक्तचाप सर्दियों में कम हो जाता है। खून की आम्लाता बढती है। ऐसे लोग ज्यादा गर्म कपडे पेहेनते हैं पर यह सही उपाय नहीं है। उन्हें अंदरूनी गर्मी की जरुरत होती है।

सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ(Best heat generating for Winter foods)

ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में गर्मी पैदा करें सर्दियों में खाने से सर्दियां अच्छी लगने लगती है। यहाँ पर कुछ ऐसे पदार्थ दिए गए हैं।

सर्दियों में सेहत के लिए लहसुन (Garlic – Winter foods)

जिन लोगों को उच्च कोलेस्ट्रोल का खतरा होता है उन्हें डॉक्टर लहसुन खाने की सलाह देते हैं। लहसुन से शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दियों में आप फ्लू और खाँसी से परेशान हो सकते हैं। लहसुन कीटाणुरोधी होता है। गले की खराश कम करने के लिए लहसुन की 2-3 कलियाँ चबाकर खाएं।

शरीर को अंदरुनी रूप से गर्म रखने के लिए शहद (Honey – Winter foods)

सर्दियों में जुकाम और खाँसी के लिए दादी माँ एक चम्मच शहद लेने की सलाह देती हैं। शहद से शरीर की प्रतिकार शक्ति बढती है। सर्दियों में हर दिन 1 चम्मच शहद लेने से आप सर्दियों से सुरक्षित रहते हैं। शहद में प्राकृतिक शक्कर होती है और शहद खाने से साधारण चीनी के हानिकारक परिणाम नहीं दिखते।

शरीर में गर्मी के लिए अदरक (Ginger – Winter foods)
अदरक आपके भोजन का स्वाद बढाने के काम आता है। यह सर्दियों में आपके शरीर को गरम रखता है। कच्चा अदरक या सुखा अदरक नमक के साथ खाने से सर्दियों के दौरान आपका हाजमा सही रहता है। चाय में अदरक डालकर पिने से शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दी का इलाज दालचीनी से (Cinnamon – Winter foods)

दालचीनी स्वाद में मीठी होती है और शरीर में गर्मी बढ़ाती है। खाने में दालचीनी डालने से खाने का स्वाद बढ़ता है। चाय, कॉफ़ी में दालचीनी डालकर ली जा सकती है।

सर्दी के उपाय सूखा मेवा से (Nuts – Winter foods)

अक्रोड, सिंगदाना और बादाम खाने से शरीर को विटामिन, तंतु मिलते हैं और शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दियों में सेहत के लिए मेथी (Fenugreek / Methi – Winter foods)

यह एक हरी पत्तेदार सब्जी है जो आयरन और फोलिक एसिड (iron and folic acid) से भरपूर होती है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) का उत्पादन बढाने में सहायता करती है। मेथी ठण्ड में पाई जाने वाली एक काफी जानी मानी सब्जी है जिसका आप कई तरीकों से प्रयोग कर सकते हैं। इससे कई तरह के नमकीन और पराठे बनाए जा सकते हैं तथा इसका प्रयोग अन्य सब्जियों जैसे आलू, गाजर और मटर के साथ किया जा सकता है।

द्रव्य और पेय पदार्थ (Fluids and beverages – Winter foods)
ठण्ड का समय सूप (soup), कॉफ़ी (coffee), चाय तथा अदरक, लौंग तथा दालचीनी के साथ मसाला चाय के सेवन का होता है। ये शरीर को हाइड्रेटेड (hydrated) रखते हैं तथा रक्त के संचार में इजाफा करते हैं।

सर्दी का इलाज सूखे फल और मेवे में (Dry Fruits And Nuts – Winter foods)

सूखे फल जैसे खुबानी (apricot), खजूर, किशमिश, बादाम, काजू, मूंगफली तथा अखरोट ठण्ड के समय आपके शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। ये विटामिन इ (vitamin E), मैग्नीशियम (magnesium) तथा जिंक (zinc) से भरपूर होते हैं तथा आपको बेचैनी, तनाव और थकान से दूर रखते हैं।

पीलिया रोग का आयुर्वेदिक इलाज, Jaundice Treatment in hindi

Jaundice Treatment
Jaundice Treatment

आज आपको पीलिया रोग का उपचार बताने जा रहा हूँ पीलिया के मरीज इसे अवश्य एक बार आजमाये वैसे तो पीलिया रोग की आयुर्वेद में वहुत इलाज हैं जिसमे कुछ उपाय मैं आपको बता रहा हूँ

piliya rog ka ayurvedic ilaj
आधा गिलास टमाटर के रस में थोड़ा-सा काला नमक और काली मिर्च मिलाएं | इसे प्रात:काल पीने से लाभ होता है | जिगर ठीक से काम करने लगता है |

Jaundice Treatment in hindi

पीपल के पेड़ की तीन-चार नई कोपलें, अच्छी प्रकार धो कर मिश्री या चीनी के साथ मिलाकर बारीक पीस लें | इसे 200 ग्राम जल में घोलकर रोगी को दिन में दो बार पिलाने से चार-पांच दिन में पीलिया से छुटकारा मिल जाता है | पीलिया के रोगी के लिए यह एक बहुत ही सरल और प्रभावशाली उपाय है |

पीलिया रोग का आयुर्वेदिक इलाज,

फिटकरी को भूनकर उसका चूर्ण बना लें | दो से चार रत्ती तक दिन में दो अथवा तीन बार छाछ के साथ पिलाने से कुछ ही दिनों में पीलिया में आराम होता है |

Jaundice ka ayurvedic ilaj

कासनी एक प्रकार की छोटे-छोटे नीले फूलों वाली बूटी है | इसके फूलों का काढ़ा बनाकर 30 से 60 मिलीलीटर तक की मात्रा में दिन में तीन बार देने से पीलिया में लाभ होता है | इससे बढ़ी हुई तिल्ली भी ठीक होती है | पित्त प्रवाह में सुचारुता तथा जिगर और पित्ताशय को ठीक से काम करने में सहायता मिलती है |

Jaundice ka ilaj

गोखरू की जड़ का काढ़ा बनाकर पीलिया के रोगी को प्रतिदिन दो या तीन बार देने से लाभ होता है | मात्रा 30 से 60 मिलीलीटर तक हो सकती है |

पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज,

घी कुआर का गूदा निकाल उसमें काला नमक और अदरक का रस मिलाकर प्रात:काल देने से सात-आठ दिन में पीलिया का रोगी ठीक हो जाता है |
पीलिया का अनोखा इलाज
कुटकी और निशोध दो देशी बूटियां हैं | इन दोनों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | एक चम्मच चूर्ण गर्म जल से रोगी को दें | इस प्रकार दिन में दो बार देने से शीघ्र लाभ होता है |

पीलिया रोगी को क्या नहीं खाना चाहिए

पीलिया के रोगी को तले हुए, मिर्च-मसालेदार व गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए | शराब, मांस, धूम्रपान, चाय आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए | स्वच्छ पानी को उबालकर ठण्डा करके पीना चाहिए | अशुद्ध और बासी खाद्य-पदार्थों का सेवन भी न करें
पीलिया का घरेलू इलाज
गाय का मूत्र भी बहुत फायदा करता है गाय देसी होनी चाहिए और उसका मूत्र 8तह सूती कपड़े से छानिये फिर 15से 20 पत्ते तुलसी का डाल कर गरम कीजिये 10से 15 मिनिट फिर उतार कर छान लें और शीशी में रख दें शुबह खाली पेट आधा गिलास पानी में 15 ml ये मूत्र मिलाये 3चमच शहद मिलाकर चमच से चलाए फिर पी लीजिये एक घंटा तक कुछ न खाए ।
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