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ज्वर या बुखार का आयुर्वेदिक उपचार, Ayurvedic treatment of fever


अडूसे के पत्ते और आँवला दोनों 25-25 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर जौकुट कर लें। इसे मिट्टी के पात्र में डालकर रख दें। 8 घंटे बाद इसे मसल-छानकर पिसी मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाना चाहिए। इससे ज्वर उतर जाता है।

एक बहुत ही अच्छा और अनेक बार का अनुभूत सफल सिद्ध नुस्खा है, जो सर्दी, जुकाम, टांसिलाइटिस, गले की खराश आदि के कारण होने वाली हरारत, हड़फुटन, शरीर का दर्द और बुखार आदि व्यधियां निरापद ढंग से ठीक कर देता है। यह नुस्खा बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी के लिए उपयोगी है-
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तुलसी की 11 पत्ती, लौंग 2 नग, अदरक का रस आधा चम्मच या सोंठ का चूर्ण आधा चम्मच और पाव (चौथाई) चम्मच सेंधा नमक, इन सबको 2 कप पानी में डालकर उबालें। जब एक कप पानी बचे तब छानकर ठण्डा कर लें। इसमें दो चम्मच शहद या पिसी मिश्री मिला लें। दो खुराक में सुबह शाम 2-3 दिन पीने से सभी व्याधियां चली जाती हैं।

पीपल का चूर्ण 3 ग्राम थोड़े से अदरक में मिला लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम चाटें। इससे बुखार और खांसी दोनों में आराम हो जाता है।

बच्चों को बुखार के साथ सर्दी-खांसी भी हो तो बेल के पत्तों का रस निकालकर शहद के साथ दिन में 2-3 बार चटाना चाहिए।

अजवायन 25 ग्राम एक गिलास पानी में डालकर उबालें। अच्छी तरह से उबालकर छान लें। रोगी को 4-4 चम्मच दिन में तीन बार पिलाने से ज्वर की बेचैनी दूर होती है और ज्वर दूर होता है।

जीर्ण ज्वर में बड़ी इलायची के बीज 10 ग्राम, बेल की जड़ की छाल 10 ग्राम, पुनर्नवा की जड़ 10 ग्राम तीनों को कूटकर काढ़ा बना लें। इसे 4-4 चम्मच दिन में तीन बार पिएं। इस प्रयोग से पुराना बुखार भी चला जाता है।

गाय के दूध में जीरे को डालकर पका लें और जीरे को सुखाकर चूर्ण कर लें। इस चूर्ण में समभाग मिश्री पीसकर मिला लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पुराना बुखार चला जाता है।
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