छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण और घरेलू उपचार:-


20/6/17

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सर्दी का लगना बेहद खतरनाक होता है। सर्दी के असर से सभी लोग प्रभावित होते हैं। लेकिन छोटे बच्चों को ठंड बड़ी जल्दी लग जाती है। जिसकी वजह से वे कई तरह के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसा ही एक रोग है निमोनिया । यह एक खतरनाक रोग है जिससे जान तक जाने का खतरा हो सकता है।

निमोनिया बच्चे को हो जाने के बाद उसे तरह-तरह की परेशानिया आने लगती है। इसलिए आपको इस बात की जानकारी का होना जरूरी है कि कैसे निमोनिया के रोग से बच्चों का बचाया जा सकता है।

निमोनिया क्या है
यह एक तरह का वायरस है जो फेफड़ों में तरल पदार्थ को जमा करके खून और हवा के बहाव को रोकता है जिससे तेज बुखार, बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द और सांस का तेजी से चलना आदि प्रमुख लक्षण होते हैं।

बच्चों में न्यूमोनिया के कई लक्षण होते हैं
बच्चे को सांस लेने में परेशानी का होना।
घरघराहट की आवाज आना।
पेट और छाती में दर्द।
नाखूनों का रंग नीला पड़ना ।
उल्टी आना।
जोड़ों में दर्द होना।
थकान।

कैसे फैलता है निमोनिया
निमोनिया का रोग कई तरह से फैल सकता है। इस रोग का वायरस बच्चे के गले या नाक में पाए जाते हैं और वे सांस के जरिए फेफड़ों में जा सकते हैं। कुपोषण, स्तनपान की कमी और अस्वस्थ वातावरण की वजह से निमोनिया से ग्रसित बच्चे की मौत तक हो सकती है। इसलिए इस बारे में सभी लोगों को जागरूक होना चाहिए।

निमोनिया छींक व खांसी से हवा नली के द्वारा भी फैल सकता है।

उचित पौष्टिक आहार, स्वच्छ पर्यावरण और वैक्सीन के द्वारा इस रोग को रोका जा सकता है।

कवर रखना
बच्चे को निमोनिया की मुख्य वजह सर्दी का लगना होता है। ऐसे में ठंड बच्चे को दो तरह से वार करती है पहला पैरों के रास्ते और दूसरा सिर के रास्ते। इन दोनों जगह पर सर्दी का असर बच्चे को बड़ी जल्दी होता है। इसलिए सिर और पैरों को ढ़क के रखना जरूरी है।

बादाम व मुनक्का
निमोनिया से बचने के लिए बच्चे को बादाम और मुनक्का को मिलाकर देना चाहिए। इससे बच्चों की इमयूनिटी पावर बढ़ती है और वे तन्दरूस्त रहते हैं। मुनक्के और बादाम के इस्तेमाल से बच्चे के खून मे गर्मी पैदा होती है और वे इस बीमारी से आसानी से बच जाते हैं।

शहद
बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए शहद महत्वपूर्ण औषधि है। शहद में हर फूल का रस मौजूद होता है जिससे शरीर का बीमार होने की संभावना कम हो जाती है। कलौंजी के तेल में शहद को मिलाकर बच्चे को देने से निमोनिया रोग दूर हो जाता है।

जैतून का तेल
जैतून का तेल अधिक गर्म होता है। रात को सोते समय बच्चों के सिर पर जैतून के तेल से मालिश करनी चाहिए। जिससे बच्चे का शरीर गर्म बना रहता है। जैतून के तेल की मालिश बच्चे के पैरों के तलवों पर भी करनी चाहिए इससे बच्चे निमोनिया की बीमारी से बचे रहते हैं।

वैक्सीन
निमोनिया को रोकने के लिए हायमोफील्स एनफलुएंजा टाईप बी और नियूमोकोकल कोंजूगेट टीके मौजूद हैं। जो बच्चे को निमोनिया से बचाते हैं। भारत में जानकारी न होने की वजह से और मंहगी कीमत से बच्चों को ये टीके नहीं लगाए जाते हैं।

निमोनिया से बचने के अन्य उपचार
पांच हरे पत्ते तुलसी के, तीन ग्राम मिश्री और पांच काली मिर्च को एक साथ मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। सुबह और शाम पानी के साथ एक गोली जरूर लें।

निमोनिया से ग्रसित बच्चे को गर्म पानी व फलों का रस बीच-बीच में पिलाते रहना चाहिए।

लहसुन की 4 कलियों को सरसों के तेल के साथ गर्म करके बच्चे की मालिश करें।

तुलसी के तीन पत्तों को पीसकर सुबह-सुबह पानी के साथ सेवन करें। यह भी निमोनिया से बचाव करता है।

दूध में थोड़ा केसर मिलाकर बच्चे को दिन में दो बार पिलाएं।

सर्दियों के मौसम में बच्चे को धूप में रखना चाहिए।

यदि इन उपचारों से बच्चे की हालत नहीं सुधरती है तो उसे तनिक भर की देर किए बिना डाक्टर को दिखा लेना चाहिए।

बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए उसे वैक्सीन यानी टीका जरूर लगवाना चाहिए। यह न्यूमोनिया के खतरे को कम कर देता है।

वे बच्चे जो समय से पहले हो जाते हैं उन्हं न्यूमोनिया खतरा अधिक रहता है। इसलिए समय-समय पर बच्चों की डाक्टरी जांच जरूर करवानी चाहिए।

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