बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज, Ayurvedic ilaj For Piles


सभी रोगियों को समर्पित पोस्ट 
आज के समय में बवासीर बहुत ही लोगों को है , बहुत परेशान करता है यह रोग । इससे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहता है मरीज । कई लोगों को आप्रेशन के बाद भी यह रोग दुबारा हो जाता है । इसका ईलाज सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेद मे बिना दर्द बिना आप्रेशन हो जाता जड़ से ।

बवासीर का घरेलु इलाज

फिटकरी सफेद की भस्म बिना उबले दूध से लेने से खूनी बवासीर में लाभ होता है ।

दारूहल्दी ,नागकेशर ,स्वर्ण गेरिक का समभाग बनाया हुआ चूर्ण ताजे जल से लेने से लाभ होगा ।

रसोत 50 ग्राम कहरवा पिष्टी 25 ग्राम मुलहठी 50ग्राम  बाबलीघास के रस में मिलाकर मटर समान गोलीयां बनाकर रख लें । दिन में तीन - चार बार दो से चार गोली तक लें ।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज

आम की गुठली ,गुलर की छाल ,नागकेशर ,लोघ्र ,फिटकरी सफेद भस्म समान भाग को अर्जुन की छाल के काढ़े में तीन बार घोटकर सुखा लें ,फिर पीपल की छाल के काढ़े में घोटकर सुखा लें फिर जिमिकंद के रस में 7 बार घोटकर सुखा लें । 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में चार बार जल या नारियल पानी से लें ।

Ayurvedic Nuskhe For Piles

नारियल की जटा की भस्म 100 ग्राम में 100 ग्राम फिटकरी भस्म 100 ग्राम मिश्री मिला कर रख लें । दिन में तीन बार पानी से या नारियल के जल से ,या कच्चे दूध की लस्सी से लें ।

Ayurvedic ilaj For Piles

नीम की निम्बोली ,बकायन फल की मींगी ,करंज बीज की गिरी ,एरंडी बीज की शुद्ध गिरी सबको जिमिकंद के रस में घोट गोली बना लें । पानी से लें ।

विशेष:- खट्टी तली चीजें , बिस्किट , नमकीन , गुड़ तैल का परहेज ,मैदा चीनी मिठाईयां का परहेज रखें ।

नोट :- गुदा को नीम के पानी से दिन में दो - तीन बार धोए ।
मस्सों वाले मरीज गुदा पर नीम का तैल , जात्यादि तैल,कासीसादि तैल लगाएं । मीट अंडा आदि का परहेज रखें । 
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