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दिल धड़कन तेज होने का कारण और आयुर्वेदिक इलाज, dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj

dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj
dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj

दिल की धड़कन तेज होना तथा अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज,

वास्तव में दिल की धड़कन कोई रोग नहीं है| किन्तु जब दिल तेजी से धड़कने लगता है तो मनुष्य के शरीर में कमजोरी आ जाती है, माथे पर हल्का पसीना उभर आता है तथा पैर लड़खड़ाने लगते हैं|
रोगी को लगता है, जैसे वह गिर जाएगा| दिल धड़कने की क्रिया भय, हानि की आशंका, परीक्षा में असफलता, ट्रेन का अचानक छूटना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि घटनाओं को देखने-सुनने के बाद शुरू हो जाती है|
यह एक प्रकार की चिन्ताजन्य घबराहट होती है जिसकी वजह से दिल बड़ी तेजी से धड़कने लगता है| यदि उसी क्षण मनुष्य मन से चिन्ता तथा भय को निकाल दे तो दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
कई बार तेज दौड़-भाग करने, देर तक व्यायाम करने या रक्तचाप की अधिकता आदि के कारण भी दिल तेजी से धड़कने लगता है| यह रोग बुढ़ापे में बहुत जल्दी लग जाता है| इसलिए इस आयु में व्यक्ति कोई सदैव प्रसन्नचित्त रहना चाहिए तथा जाने-अनजाने व्यर्थ की चिन्ताओं से दूर रहना चाहिए|

तेजी से दिल धड़कने का कारण,

dil ki dhadkan tez hone ka karan

प्रत्येक स्त्री, पुरुष और बच्चे का दिल एक निश्चित गति में धड़कता रहता है| यह धड़कन मनुष्य के स्वस्थ तथा जीवित होने का लक्षण है|

अनियमित दिल की धड़कन के लक्षण

लेकिन किसी आशंका, भय या चिन्ता के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है| यदि यह बार-बार होने लगे तो समझना चाहिए कि यह दिल की धड़कन का रोग है|

पल्स रेट बढ़ने के कारण

यह रोग प्राय: उन लोगों को बहुत जल्दी होता है जो शरीर तथा हृदय दोनों से दुर्बल होते हैं| वैसे अधिक मानसिक उत्तेजना, दुःख, कष्ट, संकट, क्षुब्धता, स्नायुमंडल का कोई रोग, उत्तेजित पदार्थों का सेवन, भय, अधिक परिश्रम, दौड़ - धूप, हस्तमैथुन, स्त्री-प्रसंग आदि कारणों से यह रोग बड़ी जल्दी हो जाता है|
तेजी से दिल धड़कने की पहचान
 रोग में कलेजा जोर-जोर से धड़कने लगता है| शरीर में कमजोरी आ जाती है| कुछ लोगों को बेचैनी भी महसूस होती है|
शरीर में शुष्कता, कंठ में खुश्की, प्यास, तन्द्रा, अजीर्ण, भूख न लगना, दिल का जैसे बैठ जाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं| हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं| शरीर की प्राणवायु शिथिल हो जाती है|
सांस लेने में कठिनाई होती है| बस खाट पर लेटे रहने की इच्छा होती है| ऐसे में प्रिय व्यक्ति से बात करना भी अच्छा नहीं लगता|

तेजी से दिल धड़कने के आयुर्वेदिक इलाज

गाय के दूध में किशमिश तथा बादाम डालकर औटाएं| फिर शक्कर डालकर सहता-सहता घूंट-घूंट पी लें|
पिस्ते की लौज खाने से हृदय की धड़कन ठीक हो जाती है|
दो चम्मच प्याज के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें|
भोजन के बाद चार चम्मच अंगूर का रस पिएं|
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें| फिर इसमें धनिया का चूर्ण समभाग में मिलाएं| एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पिएं|

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अनार के कोमल कलियों की चटनी बनाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह के समय निहार मुंह खाएं| लगभग एक सप्ताह सेवन करने से दिल की धड़कन सही रास्ते पर आ जाती है|
बेल का गूदा लेकर उसे भून लें| फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें|

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200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें| फिर इस पानी को आंच पर रखें| जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें| यह दिल को मजबूत करता है|

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आंवले के चूर्ण में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद खाएं| यह दिल की धड़कन सामान्य करता है| इससे रक्तचाप में भी लाभ होता है क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने पर रक्तचाप भी बढ़/घट जाता है|
पके पपीते का रस एक कप की मात्रा में भोजन के बाद सेवन करें|
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आधा कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन दोपहर के समय पिएं|
दिल धड़कने पर जरा-सा कपूर जीभ पर रखकर चूसें|
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आधे कप सेब के रस में चार कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|

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लाल इलायची के दानों को पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से चौथाई चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर खाएं|

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टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें| टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक नुस्खे
पानी में आधा नीबू निचोड़ें तथा उसमें दो चुटकी खाने वाला सोडा डालें| इस नीबू-पानी को पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज
आधा चम्मच अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक - दोनों को पीसकर गुनगुने पानी के साथ खाएं| यह चूर्ण दिल की तेज धड़कन को सामान्य बना देता है| यह एक बेहतरीन नुस्खा माना जाता है|

अनियमित दिल की धड़कन का इलाज

अदरक का रस एक चम्मच, तुलसी के पत्तों का रस चौथाई चम्मच, लहसुन का रस दो बूंद तथा सेंधा नमक एक चुटकी - सबको अच्छी तरह मिलाकर उंगली से चाटें| चाटते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेट में लार अधिक मात्रा में जाए|
अनियमित दिल की धड़कन के लिए आयुर्वेदिक इलाज
कंधारी अनार का रस कालीमिर्च के चूर्ण तथा सेंधा नमक मिलाकर लेने से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
राई पीसकर छाती पर मलने से भी दिल को काफी आराम मिलता है|

तेजी से दिल धड़कने में क्या खाएं क्या नहीं
सादा तथा सुपाच्य भोजन भूख से कम खाएं| साथ में अधिक चिकने पदार्थ न लें क्योंकि चिकनी चीजें शरीर को बल देने साथ-साथ रक्त को गाढ़ा करती हैं जो दिल धड़कने वाले रोगी के लिए हानिकारक है|

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मौसमी फल तथा मौसमी हरी सब्जियां अधिक मात्रा में सेवन करें| परन्तु ठंडी तासीर के फल तथा सब्जियां बिलकुल न खाएं| रक्तचाप की जांच कराते रहें|

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भोजन के साथ कच्ची अदरक, कच्ची प्याज तथा कच्चे चनो का इस्तेमाल अवश्य करें| अंकुरित मूंग दिल की धड़कन में बहुत लाभकारी है| मसालों में लाल मिर्च न खाकर कालीमिर्च, लौंग, जावित्री, तेजपात आदि साग-सब्जी में डालकर सेवन करें|

dil ki dhadkan tej hone par kya kare
बकरी तथा गाय का दूध अवश्य लें| बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, खजूर, चिलगोजे आदि मेवे दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखते हैं| साथ ही चिंता, शोक, निराशा एवं विषाद आदि नकारात्मक भावों से स्वयं को बचाएं|
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