हिलते दांतों का आयुर्वेदिक इलाज Loose Teeth treatment in Hindi


Loose Teeth treatment

दांतों की ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडोंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइब्रस टिश्‍यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्‍यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्‍या होने लगती है। यह समस्‍या दांतों को बहुत ज्‍यादा रगड़ने, गम क्‍लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है।

हिलते दांतों का इलाज

Loose Teeth  treatment in Hindi
Loose Teeth  treatment in Hindi 


काली मिर्च और हल्‍दी का पेस्ट --
इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्‍या होने पर काली मिर्च और हल्‍दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्‍ट बनाना लें। इस पेस्‍ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्‍ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्‍या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।

dant dard ka ayurvedic ilaj

पुदीने का तेल
पुदीने के तेल में दांतों की समस्‍याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्‍टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्‍या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्‍छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्‍ला करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

Loose Teeth treatment

सरसों का तेल और नमक
प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्‍ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्‍द ही आराम मिलने लगेगा।

Home Remedies For Loose Teeth in Hindi

दांत मजबूत करने के घरेलू उपाय- आंवला

आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्‍ला कर लें या इसे पी लें।

मसूड़ों को मजबूत करने के उपाय

लौंग के तेल के प्रयोग
लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्‍तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्‍यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।

दांतों का हिलना कैसे बंद करें

अजवायन की पत्तियों का तेल
आजवाइन की पत्‍ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है।
दांतों को मजबूत बनाने के उपाय नमक का प्रयोग करें
नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्‍मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज, asthma ka ayurvedic ilaj

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अस्थमा एक फेफड़े की बीमारी है जो साँस लेने में कठिनाई का कारण बनता है। फेफड़ों में हवा के प्रवाह में रुकावट होने पर अस्थमा अटैक होता है।

अस्थमा के कारण

एलर्जी, वायु प्रदूषण, धूम्रपान और तंबाकू, श्वसन संक्रमण, जेनेटिक्स (आनुवांशिक), मौसम के कारण, मोटापा, तनाव
अस्थमा (दमा) के लक्षण
साँस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या दर्द, खाँसी, घरघराहट, लगातार सर्दी और खांसी

अस्थमा के घरेलू नुस्खे

अदरक का रस, अनार का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन करें।

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नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता हैं जो अस्थमा के इलाज में सहायक होता है। एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस निचोड़ लें और उसमें अपने स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पीयें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज

आंवला दमा के उपचार के लिए एक अच्छा उपाय है। आंवला को कुचलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और सेवन करें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक नुस्खे

तीन सूखे अंजीर को धो लें और रात भर एक कप पानी में भिगोएँ। सुबह में खाली पेट अंजीर खा लें और अंजीर का पानी पीयें।
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एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रात में सोने से पहले सेवन करें। यह गले से कफ को निकालने में मदद करता है और इससे अच्छी नींद आती है।
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प्याज में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण दमा के इलाज में मदद करता है। प्याज को सलाद के रूप में या सब्जियों में पकाकर खा सकते है।
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एक गिलास गर्म दूध में जैतून का तेल और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इसमें कुछ लहसुन की कली डालकर नाश्ता करने से पहले सेवन करें।
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संतरा, पपीता, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी भी अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
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पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर उबाल लें और इसका भाप लें। आप चाहे तो इसे पी भी सकते है।
अपने आहार में अधिक ताजा फल और सब्जियों को शामिल करें।

दिल धड़कन तेज होने का कारण और आयुर्वेदिक इलाज, dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj

dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj
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दिल की धड़कन तेज होना तथा अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज,

वास्तव में दिल की धड़कन कोई रोग नहीं है| किन्तु जब दिल तेजी से धड़कने लगता है तो मनुष्य के शरीर में कमजोरी आ जाती है, माथे पर हल्का पसीना उभर आता है तथा पैर लड़खड़ाने लगते हैं|
रोगी को लगता है, जैसे वह गिर जाएगा| दिल धड़कने की क्रिया भय, हानि की आशंका, परीक्षा में असफलता, ट्रेन का अचानक छूटना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि घटनाओं को देखने-सुनने के बाद शुरू हो जाती है|
यह एक प्रकार की चिन्ताजन्य घबराहट होती है जिसकी वजह से दिल बड़ी तेजी से धड़कने लगता है| यदि उसी क्षण मनुष्य मन से चिन्ता तथा भय को निकाल दे तो दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
कई बार तेज दौड़-भाग करने, देर तक व्यायाम करने या रक्तचाप की अधिकता आदि के कारण भी दिल तेजी से धड़कने लगता है| यह रोग बुढ़ापे में बहुत जल्दी लग जाता है| इसलिए इस आयु में व्यक्ति कोई सदैव प्रसन्नचित्त रहना चाहिए तथा जाने-अनजाने व्यर्थ की चिन्ताओं से दूर रहना चाहिए|

तेजी से दिल धड़कने का कारण,

dil ki dhadkan tez hone ka karan

प्रत्येक स्त्री, पुरुष और बच्चे का दिल एक निश्चित गति में धड़कता रहता है| यह धड़कन मनुष्य के स्वस्थ तथा जीवित होने का लक्षण है|

अनियमित दिल की धड़कन के लक्षण

लेकिन किसी आशंका, भय या चिन्ता के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है| यदि यह बार-बार होने लगे तो समझना चाहिए कि यह दिल की धड़कन का रोग है|

पल्स रेट बढ़ने के कारण

यह रोग प्राय: उन लोगों को बहुत जल्दी होता है जो शरीर तथा हृदय दोनों से दुर्बल होते हैं| वैसे अधिक मानसिक उत्तेजना, दुःख, कष्ट, संकट, क्षुब्धता, स्नायुमंडल का कोई रोग, उत्तेजित पदार्थों का सेवन, भय, अधिक परिश्रम, दौड़ - धूप, हस्तमैथुन, स्त्री-प्रसंग आदि कारणों से यह रोग बड़ी जल्दी हो जाता है|
तेजी से दिल धड़कने की पहचान
 रोग में कलेजा जोर-जोर से धड़कने लगता है| शरीर में कमजोरी आ जाती है| कुछ लोगों को बेचैनी भी महसूस होती है|
शरीर में शुष्कता, कंठ में खुश्की, प्यास, तन्द्रा, अजीर्ण, भूख न लगना, दिल का जैसे बैठ जाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं| हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं| शरीर की प्राणवायु शिथिल हो जाती है|
सांस लेने में कठिनाई होती है| बस खाट पर लेटे रहने की इच्छा होती है| ऐसे में प्रिय व्यक्ति से बात करना भी अच्छा नहीं लगता|

तेजी से दिल धड़कने के आयुर्वेदिक इलाज

गाय के दूध में किशमिश तथा बादाम डालकर औटाएं| फिर शक्कर डालकर सहता-सहता घूंट-घूंट पी लें|
पिस्ते की लौज खाने से हृदय की धड़कन ठीक हो जाती है|
दो चम्मच प्याज के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें|
भोजन के बाद चार चम्मच अंगूर का रस पिएं|
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें| फिर इसमें धनिया का चूर्ण समभाग में मिलाएं| एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पिएं|

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अनार के कोमल कलियों की चटनी बनाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह के समय निहार मुंह खाएं| लगभग एक सप्ताह सेवन करने से दिल की धड़कन सही रास्ते पर आ जाती है|
बेल का गूदा लेकर उसे भून लें| फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें|

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200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें| फिर इस पानी को आंच पर रखें| जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें| यह दिल को मजबूत करता है|

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आंवले के चूर्ण में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद खाएं| यह दिल की धड़कन सामान्य करता है| इससे रक्तचाप में भी लाभ होता है क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने पर रक्तचाप भी बढ़/घट जाता है|
पके पपीते का रस एक कप की मात्रा में भोजन के बाद सेवन करें|
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आधा कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन दोपहर के समय पिएं|
दिल धड़कने पर जरा-सा कपूर जीभ पर रखकर चूसें|
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आधे कप सेब के रस में चार कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|

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लाल इलायची के दानों को पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से चौथाई चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर खाएं|

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टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें| टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक नुस्खे
पानी में आधा नीबू निचोड़ें तथा उसमें दो चुटकी खाने वाला सोडा डालें| इस नीबू-पानी को पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज
आधा चम्मच अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक - दोनों को पीसकर गुनगुने पानी के साथ खाएं| यह चूर्ण दिल की तेज धड़कन को सामान्य बना देता है| यह एक बेहतरीन नुस्खा माना जाता है|

अनियमित दिल की धड़कन का इलाज

अदरक का रस एक चम्मच, तुलसी के पत्तों का रस चौथाई चम्मच, लहसुन का रस दो बूंद तथा सेंधा नमक एक चुटकी - सबको अच्छी तरह मिलाकर उंगली से चाटें| चाटते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेट में लार अधिक मात्रा में जाए|
अनियमित दिल की धड़कन के लिए आयुर्वेदिक इलाज
कंधारी अनार का रस कालीमिर्च के चूर्ण तथा सेंधा नमक मिलाकर लेने से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
राई पीसकर छाती पर मलने से भी दिल को काफी आराम मिलता है|

तेजी से दिल धड़कने में क्या खाएं क्या नहीं
सादा तथा सुपाच्य भोजन भूख से कम खाएं| साथ में अधिक चिकने पदार्थ न लें क्योंकि चिकनी चीजें शरीर को बल देने साथ-साथ रक्त को गाढ़ा करती हैं जो दिल धड़कने वाले रोगी के लिए हानिकारक है|

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मौसमी फल तथा मौसमी हरी सब्जियां अधिक मात्रा में सेवन करें| परन्तु ठंडी तासीर के फल तथा सब्जियां बिलकुल न खाएं| रक्तचाप की जांच कराते रहें|

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भोजन के साथ कच्ची अदरक, कच्ची प्याज तथा कच्चे चनो का इस्तेमाल अवश्य करें| अंकुरित मूंग दिल की धड़कन में बहुत लाभकारी है| मसालों में लाल मिर्च न खाकर कालीमिर्च, लौंग, जावित्री, तेजपात आदि साग-सब्जी में डालकर सेवन करें|

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बकरी तथा गाय का दूध अवश्य लें| बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, खजूर, चिलगोजे आदि मेवे दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखते हैं| साथ ही चिंता, शोक, निराशा एवं विषाद आदि नकारात्मक भावों से स्वयं को बचाएं|

स्‍वाइन फ्लू के लक्षण और इससे बचने के घरेलू उपचार


स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है जो एच-1 एन -1 वायरस के द्वारा होता है, जिसके लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम जैसे ही होते है।  इसमें गले में खराश , नाक बहना या बंद होना , बुखार , सिरदर्द , शरीर में दर्द , ठंड लगना , पेट में दर्द , कभी-कभी दस्त व उल्टी आदि।

संक्रमित व्यक्ति के खांसने या उसे छींक आने से निकले द्रव की बूंदों से ये फैलता है।   इन्फेक्शन लगने पर एक से सात दिनों में लक्षण उत्पन्न हो जाते है। swine flu ke gharelu nuskhe अपनाने से बहुत लाभ होता है जानिये इनके बारे में।

स्वाइन फ्लू के घरेलु  नुस्खे

डेढ़ कप पानी में तीन चार तुलसी के पत्ते , चार काली मिर्च , आधा चम्मच हल्दी  पाउडर , अदरक , जीरा व थोड़ी चीनी डालकर पानी एक कप रह जाने तक उबालें फिर इसमें थोडा नींबू का रस डालकर गुनगुना सेवन करें . दिन में 2-3 बार ले सकते है।

अमृतधारा की दो बूँद रुमाल या रुई पर लगाकर  बार बार सूंघते रहें।

कपूर , इलायची व लौंग को पीसकर मिलाकर छोटी पोटली बनाकर सूंघते रहें। नाक गले और फेफड़ों को इन्फेक्शन से बचाने का उत्तम उपाय है।

तुलसी के तीन चार पत्ते रोज सुबह खाएं। तुलसी के पत्ते इन्फेक्शन से बचाते है। फेफड़ों और गले को ठीक रखने में मदद करते है।

 ताजा गिलोय का रस चार चम्मच रोज पियें। गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते है।

 गिलोय काढ़ा बनाने की विधि इस प्रकार है :-
गिलोय बेल की एक फुट लम्बी डंडी के टुकड़े और पांच तुलसी के पत्ते दो गिलास पानी में डाल कर उबालें। आधा रह जाने पर थोड़ा ठंडा हो जाये तब छान लें। इसमें सेंधा नमक और काली मिर्च डाल कर गुनगुना पी लें। दिन में एक बार लेने से इम्युनिटी बढ़ती है। बहुत फायदेमंद है।

दिन में तीन बार नाक में तिल के तेल की दो दो बूँद डाले।

ग्वारपाठा ( Aloe vera ) का गूदा एक चम्मच रोज ले। ये इम्युनिटी बढ़ाता है और जाइंट्स के दर्द में आराम दिलाता है।

आंवले का रोजाना किसी भी रूप में सेवन करें। आंवले से भरपूर विटामिन “C ” मिलता है जो आपको हर प्रकार के इन्फेक्शन से बचाता है।

अपने हाथ बार बार साबुन से अच्छे से धोएँ। विशेष कर यदि आप घर से बाहर जाकर आये हों। हाथों के माध्यम से इन्फेक्शन लगने की सम्भावना ज्यादा होती है।

इनमे से जो भी उपाय कर सकते है आपको करने चाहिए। इन swine flu ke gharelu upay  से आप अवश्य ठीक रह पाएँगे।

इन उपायों से आराम नहीं आए तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें .

पेशाब में परेशानी के घरेलु नुस्खे – Urine Problem Home Remedies


पेशाब या मूत्र उत्सर्जन हमारे शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का एक माध्यम है। प्रकृति ने हमारे शरीर को शुद्ध रखने के लिए कई तरह की महत्त्वपूर्ण कार्य प्रणाली बनाई है। जिनमे से मूत्र विसर्जन एक है। हमारे शरीर में मौजूद दो गुर्दे ( Kidney ) लगातार खून को साफ करते रहते है। खून दिन में कई बार गुर्दों से होकर गुजरता है।

गुर्दे खून से अवशिष्ट पदार्थ खासकर यूरिया और यूरिक एसिड को बाहर निकालते है। शरीर में पानी की मात्रा संतुलित रखते है। इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस ( सोडियम ,पोटेशियम, कैल्शियम आदि ) बनाए रखते है। इसके अलावा खून की मात्रा और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते है।

इस प्रक्रिया में मूत्र या पेशाब ( Urine ) बनता है जो मूत्र नलिकाओं से होता हुआ पेशाब की थैली ( Urine Bladder ) में लगातार इकठ्ठा होता रहता है। ब्लैडर से मूत्र यूरेथ्रा ( Urethra ) से होता हुआ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। प्रत्येक किडनी में लगभग 10 लाख न्यूरॉन्स होते है जो छलनी का काम बड़ी मुस्तैदी से करते है। इस प्रक्रिया में पानी बहुत महत्त्वपूर्ण है। पानी की मदद से ये क्रिया आसानी से चलती रहती है।

इसलिए चाहे सर्दी हो या गर्मी पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत आवश्यक होता है। पानी कितना कब और कैसे पीना चाहिए यह जानने के लिए  यहाँ क्लिक करें। गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए स्किन के माध्यम से भी बहुत सारा पानी निकल जाता है। यदि गर्मी में अधिक पानी नहीं पीते है तो ये कार्य प्रणाली गड़बड़ा जाती है और कई तरह  परेशानी पैदा हो जाती है। जैसे पेशाब में जलन होना , पेशाब रुक रुक कर आना , पेशाब का रंग पीला होना आदि। पेशाब में परेशानी के दूसरे कारण भी हो सकते है।

इसके अलावा कई बार पेशाब सम्बन्धी दूसरी तकलीफें हो जाती है । जैसे पेशाब बार बार आना। पेशाब के साथ वीर्य आना। जिसे पेशाब के साथ धातु जाना भी कहते है। पेशाब के साथ खून या मवाद आना आदि। पेशाब लाल या गुलाबी रंग का आना। पेशाब में इन सभी तरह की समस्याओं में  घरेलु नुस्खों से आराम आ जाता है। ये पेशाब में परेशानी के घरेलु उपचार उपयोग में लेकर परेशानी से मुक्ति पाई जा सकती है। समस्या अधिक गम्भीर हो तो चेकअप जरूर कराना चाहिए

मूत्र रोगों के घरेलु उपाय – Mutra Rog Gharelu Upay
रात को एक गिलास पानी में 10 -12 मुनक्का भिगो दें। सुबह मुनक्का उसी पानी के साथ पीस लें। इसे छानकर इसमें थोड़ा भुना पिसा जीरा मिलाकर पीये। इससे पेशाब की जलन मिट जाती है और पेशाब खुलकर आता है।

 एक गिलास पानी में दो चम्मच साबुत धनिया और एक चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को भिगो दें। सुबह उसी पानी में मसल कर छान कर पी लें। ऐसा ही पानी शाम को भी पिएँ। 5 -7 दिन इस पानी को सुबह शाम पीने से पेशाब में जलन मिट जाती है।

रात को एक गिलास पानी  में दो देसी गुलाब के फूल की पत्तियां डालकर रख दें। सुबह हल्का सा मसल कर छान लें। एक चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर पी लें। ये पानी कुछ दिन लगातार पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।

एक बताशे में 3 -4 बूँद शुद्ध चन्दन का तेल डालकर खा लें। सप्ताह भर लें।  पेशाब की हर तरह की जलन मिटाने के लिए ये प्रयोगउत्तम है।

 एक कप खीरे का रस कुछ दिन लगातार पीने से पेशाब में जलन शांत होती है

 एक गिलास लौकी का रस सुबह शाम रोजाना पीने से पेशाब की जलन में बहुत आराम आ जाता है।

250 ग्राम बथुआ लगभग तीन ग्लास पानी में उबाल लें। ठंडा होने पर छान लें। इस पानी में स्वाद के अनुसार सेंधा नमक , नींबू  का रस और काली मिर्च मिलाकर पी लें। दिन में तीन बार ये पानी पीने से पेशाब में जलन ,पेशाब के बाद दर्द आदि ठीक हो जाते है।

>>एसिडिटी और हाइपर एसिडिटी के लिए जादुई नुस्खा।
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आधा गिलास चावल के मांड में चीनी मिलाकर पीने से पेशाब की जलन मिटती है।

साबुत धनिये की गिरी पिसी हुई और कुंजा मिश्री पिसी हुई दोनों समान मात्रा में लेकर मिला लें। इसे सुबह शाम खाली पेट एक एक चम्मच ठन्डे पानी से फांक लें। पेशाब में जलन अवश्य दूर हो जाएगी।

बील की 8 -10 पत्तियां  बारीक पीस कर एक गिलास पानी में घोलकर पी लें। ये उपाय सुबह शाम तीन दिन में पेशाब की जलन मिटा देगा।

पेशाब में रूकावट 
आधे ग्लास पानी में आधा गिलास लौकी का रस , चार चम्मच पिसी मिश्री और एक ग्राम कलमी शोरा मिलाकर पीने से पेशाब की रूकावट दूर होकर पेशाब आना शुरू हो जाता है। एक खुराक काफी होती है। अगर असर नहीं हो तो एक घंटे बाद एक खुराक और लेनी चाहिए।

  एक गिलास पानी में भुट्टे के सुनहरे बाल लगभग ३० ग्राम डालकर उबालें। एक तिहाई रह जाये तब छान कर पी लें। इसमें कुछ भी ना मिलाएं। इससे पेशाब साफ़ और खुलकर आता है। रुक रुक कर बूँद बूँद आना बंद  होता है। सुबह शाम ये पानी पीने से छोटी गुर्दे की पथरी भी निकल जाती है।

बार पेशाब आना 
यह डायबिटीज के कारण हो सकता है। पेशाब की और खून की जाँच करानी चाहिए। यदि इनमे शक्कर की मात्रा ज्यादा आये तो डायबिटीज का इलाज लेना चाहिए। डायबिटीज के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शाम के समय भुने हुए चने आधी कटोरी छिलके सहित अच्छे से चबा चबा खाकर ऊपर से थोड़ा गुड़ खा लें। फिर थोड़ा पानी पी लें।

इस तरह 10 -12 दिन लगातार चने खाने से ज्यादा और बार बार पेशाब आना बंद हो जाता है।

सर्दी के मौसम में सुबह शाम तिल और गुड़ का लडडू  खाने से बार बार  पेशाब आना कम होता है।

रात को बार बार पेशाब आता हो तो शाम को पालक किसी भी रूप में खाने से फायदा होता है।

लंच के बाद दो पके हुए हुए केले खाने से ज्यादा और बार बार पेशाब आना ठीक हो जाता है।

अंगूर खाने या अंगूर का रस पीने से गुर्दों को ताकत मिलती है बार बार पेशाब आना बंद होता है।

जामुन की गुठली और काले तिल पीस कर समान मात्रा में लेकर मिला लें। मिश्रण सुबह शाम दो चम्मच पानी के साथ लेने से बिस्तर में पेशाब आना और वृद्धजनो का बार बार पेशाब आना बंद हो जाता है।

पिसी हुई अजवायन आधा चम्मच और गुड़ आधा चम्मच दोनों को मिलाकर खाने से मूत्र अधिक मात्रा में आना बंद हो जाता है।

पेशाब के साथ वीर्य या धातू जाना 
एक कटोरी साबुत गेहुँ रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसी पानी के साथ इसे बारीक पीस ले। इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर पी लें। इसे एक सप्ताह तक लगातार पीने से पेशाब के साथ वीर्य जाना बंद होता है।

दो चम्मच आंवले का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर कुछ दिन लगातार पीने से पेशाब के साथ वीर्य या धातू जाना बंद होता है।

भारतीय सेना अपने हॉस्पिटल में गेंदे का फूल का प्रयोग करती है ! आप भी कीजिए


गेंदे का फूल जिसको मराठी में जेंडू कहते है. गेंदे के फूल को दुनिया में सर्वोतम ओषधि में गिना जाता है, ये बहुत ही अच्छी ओषधि है, इसमे इतनी ताकत है कि ये गंभीर से गंभीर चोट को भी ठीक कर देता है. आपको याद होगा कि अभी थोड़े समय पहले कारगिल का युद्ध हुआ, उस कारगिल युद्ध में भारत में 680 सैनिक शहीद हुए और 1200-1300 सैनिक घायल हुए थे. इनमे किसी को गोली लगी थी, किसी को बम लगा था जिसके परिणाम सवरूप सबको बहुत ज्यादा घाव हो गए थे.

आप किसी भी मिलट्री हॉस्पिटल में जायेंगे तो आप देखेगे कि जिन सैनिको को गोली आदि से घाव होते है उनको वहा के डॉक्टर यही गेंदे के फूल का रस सैनिको को दिया जाता है. और उनके घाव पर गेंदे के फूल की चटनी बनाकर उसको घाव पर लगाया जाता है, इस गेंदे के फूल की चटनी को अगर घाव पर लगाया जाए तो बड़े से बड़ा घाव ठीक हो सकता है. और अगर आप ये गेंदे का रस साथ में पीने को दिया जाए तो घाव और जल्दी ठीक होता है.

कारगिल युद्ध में जितने भी भारतीय सैनिक घायल हुए थे, या जिनको चोंटे आई थी उन सबको यही इलाज दिया गया था, और इसके बहुत अच्छे परिणाम आए थे. इस गेंदे के फूल को हमसे अपने घर में रखे. आजकल तो घर के गमले में भी लोग गेंदे के फूल का पौधा लगाने लगे है, आप भी लगा लीजिए. ये फूल किसी भी प्रकार की चोंट में अद्बुत काम करता है. गेंदे का फूल दुनिया का सबसे बड़ा एंटीसेप्टिक है. इससे अच्छा एंटीसेप्टिक पूरी दुनिया में कोई नहीं है.

और अगर आप गेंदे के फूल की चटनी और कच्ची हल्दी के रस को आपस में मिलाए तो ये बिलकुल सोने पे सुहागे जैसा हो जाता है. बहुत ही अद्बुत कोम्बीनेशन है गेंदे के फूल और हल्दी का, ख़राब से ख़राब घाव हो या पूरा शरीर सड गया हो उसपर पर लगा दीजिये बहुत ही अच्छे रिजल्ट देगा. राजीव भाई ने इस दवा का उपयोग कोड़ीयों पर किया था, कोड़ी तो आप समझते ही होंगे जिनका शरीर घलना शुरू हो जाता है. उनके शरीर के गले हुए अंगो पर जब राजीव भाई ने इसको लगाया तो उनका शरीर गलना बंद हो गया और धीरे धीरे ठीक हो गया.

गेंदे के फूल का सबसे बड़ा उपयोग ये है कि शरीर के बाहर किसी भी तरह का घाव या चोट हो, गोली लग गई हो, बम लग गया हो, एक्सीडेंट हो गया हो, उसके घाव को जल्दी भरना हो उसकी सबसे अच्छी ओषधि ये गेंदे का फूल है.

दांतों के कीड़े से मिनटों में पाये छुटकारा बस एक बार इसे इस्तमाल करके जरुर देखे



दांत में कीड़ा लगना एक आम समस्या है। जो किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष या कोई छोटा बच्चा ही क्यों न हो। इसका कारण होता है दांतों की अच्छे से देखभाल न करना और कीड़ा लगना एक एसा रोग है। जिसका पता ही नहीं चलता और एक दिन दांत में तेज दर्द के कारण परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

दाँत के कीड़े का कारण :-
दांत में कीड़ा दांत पर जमा होने वाले मैल की परत के कारण लगता है। और ये कोई कीड़ा नहीं होता। ये दाँतों की सही तरीके से सफाई नहीं होने की वजह से दाँत को हुआ नुकसान है। जिसके कारण दांत की ऊपरी मजबूत परत नष्ट हो जाती है। और दाँत अंदर तक ख़राब हो जाता है।

मैल की परत बनने के चार मुख्य कारण होते है :-

बैक्टीरिया, लार, एसिड, भोजन के कण हम सभी के मुँह में बैक्टीरिया मोजुद होते है। हमारे खाने पीने के सामान में यदि किसी भी रूप में शक्कर है। तो मुँह में रहने वाले बैक्टीरिया तुरंत शक्कर को एसिड में बदलना शुरू कर देते है। भोजन के कण भी एसिड में बदल जाते है। दाँत का मजबूत इनेमल इस एसिड से दांत की रक्षा करता है।

लेकिन यदि किसी कारण से दांत का ये इनेमल कमजोर पड़ जाता है तो एसिड धीरे धीरे दांत को अंदर तक खोखला कर देता है। ऊपर से सिर्फ छोटा सा काला बिंदु दिखाई देता है। लेकिन हो सकता है की अंदर से दांत ज्यादा नष्ट हो चूका हो।
दाँत के कीड़े का इलाज : -
दोस्तों अगर किसी कारण से आपके दांतों में कीड़ा लग गया है और आप दर्द से बहुत परेशान है तो हम आपको एक बहुत ही जबदस्त नुस्खे के बारे में बताने जा रहे है। इसके लिए आपको जो आवस्क सामग्री चाहिए वह कुछ एस प्रकार है।
2. सरसों का तेल एक चमच
हमने सरसों के तेल को गर्म करके उसमे फिटकरी का पाउडर आचे से मिलाकर एक पेस्ट बना लेना है। आपका नुस्खा तयार है हमने जिस भी दांत में कीड़ा लगा है उसकर अच्छे से एस पेस्ट को भर लेना है और थोड़ी देर मुंह खोलकर रखना है एसा करने से आपको दर्द तो होगा लेकिन कुछ ही मिनटों में आपका दांतों में लगा कीड़ा मुंह की लार के साथ बाहर गिरने लगता है।

क्या आप घुटनों के असहनीय ददॅ से परेशान हैं। Get rid of knee pain

जोड़ों व् घुटने का दर्द
जोड़ों व् घुटने का दर्द


जोड़ों व् घुटने का दर्द, डायबिटीज, मोटापा, गैस बनना और ह्रदय सम्बंधित बीमारियो से मुक्त होने का एक सफल उपाय।

सामग्री : मैथी 250 ग्राम, अजवायन 100 ग्राम, काली जीरी 50 ग्राम।

चूर्ण बनाने की विधि : 
उपरोक्त तीनो चीजो को साफ़ करके हल्का हल्का सैकना (ज्यादा नही सैकना) है। तीनो को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पाउडर बनाकर अच्छा पैक डिब्बा शीशी या बरनी में भर लेवे।
चूर्ण लेने की विधि : 
रात्रि में सोते वक़्त आधा चम्मच पाउडर को एक गिलास गुनगुने (गर्म) पानी के साथ लेना है। गर्म पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है। चूर्ण के लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नही है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकते है।

नोट : 
चूर्ण रोज रोज लेने से शरीर के कोने कोने में जमा पड़ी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जायेगा। पूरा 80 से 90 दिनों में महसूस होगा। फालतू चर्बी गल जायेगी। नए शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जायेगी। शरीर तेजस्वी फुर्तीला व् सुन्दर बन जायेगा।

लाखो दुःखो की एक दवा :

1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसे जिद्दी रोग दूर हो जायेगा। हड्डिया मजबूत होगी।
2. कार्य करने की शक्ति स्फूर्ति बढ़ेगी।
3. आँखों की रोशनी बढ़ेगी।
4. बालो का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जी ठीक होगी।
6. कफ से मुक्ति।
7. थकान दूर होगी।
8. याददाश्त बढ़ेगी।
9. बहरापन दूर होगा।
10. स्त्री का शरीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुन्दर बनेगा।
11. भूतकाल में जो एलोपेथिक दवा और भविष्य में जो लेना पड़ सकता है वो एलोपेथिक दवाइयो के साइड इफ़ेक्ट से मुक्त होंगे।
12. दांत मजबूत होंगे।
13. शरीर की सारी कलिकाएँ शुद्ध हो जायेगी।
14. नपुंसकता दूर होगी।
15. मलेरिया, पीलिया, टाइफाइड, कोलेरा, सिरदर्द के सामने प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी।
16. स्त्रियो में शादी के बाद होने वाली तकलीफे दूर होगी और शादी से पहले रोगों से मुक्ति मिलेगी।
17. शरीर में हवा पानी धुप तापमान द्वारा होने वाले रोगों से मुक्ति मिलेगी।
18. खाना भारी व् ज्यादा मात्रा में खाने पर भी आराम से पच जायेगा।
19. हार्ट अटैक से मुक्ति मिलेगी व् कोलेस्ट्रोल घट जायेगा।
20. डायबिटीज कंट्रोल में रहेगी।

कृपया ध्यान दे :
जिनको गर्मी ज्यादा लगती है और गर्म चीजो से परहेज करते है। वे इसका सेवन ना करे।