Piles बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज, bawaseer ka ayurvedic ilaj

bawaseer ka ayurvedic ilaj
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दुनिया में बहुत लोग बवासीर से परेशान है । इंसान का उठना बैठना इसके कारण मुशकिल हो जाता । कई को बहुत ही असहनीय दर्द की अनुभूती होती है ।
इस रोग का कारण खट्टी तले पदार्थ ,तेज मिर्च मसालेदार वस्तुएं ,कब्ज आदि है ।

bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi me

ऐलोपेथी में इसका इलाज सिर्फ आप्रेशन है । लेकिन उसके बावजूद भी यह रोग दोबारा घेर लेता है । आखिर कितने आप्रेशन करवाए जाएं । लेकिन आपको घबराने की जरूरत नही । आयुर्वेद में इस रोग की बहुत सफल औष्धियाँ है । जो इस रोग को जड़ मूल से ठीक कर देती है । मैं आपको घरेलु नुस्खे बता रहा हुँ जिनकी मदद से आपको काफी राहत मिलेगी । अगर आपका रोग पुराना है या आप्रेशन करवा लिया है या अन्य किसी प्रकार की चिकित्सा से आराम नही हुआ तो आप बेझिझक मुझसे संपर्क कर सकते है ।

बवासीर नाशक 10 घरेलु इलाज

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50 ग्राम तिल को चबाकर खाने के बाद ऊपर से दही खा लेने से रक्तस्राव रूकता है ।

khooni bawaseer ka ayurvedic ilaj

मेथी बीज दूध में उबालकर लेने खूनी बवासीर में लाभ होता है ।

badi bawaseer ka ayurvedic ilaj

10 ग्राम ईशबगोल भुसी रात को दूध से लें । इससे दोनों बवासीर में लाभ होगा ।
पुरानी बवासीर का इलाज
एक कप मूली के रस में देशी घी मिलाकर सुबह- शाम पीएं । मूली का सलाद भी ले सकते है ।

bawaseer ka ayurvedic ilaj in hindi

करेले का रस सुबह खाली पेट लें ।
खुनी बवासीर का रामबाण इलाज
नारियल की जटा जलाकर ,समभाग फिटकरी का फूला ,मिश्री मिलाकर 10 ग्राम तक नारियल के पानी या दूध पानी की लस्सी से लें ।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज

गुनगुना दूध में नीबू निचोड़ कर पीएं ।नीबू काटकर उसमें कत्था लगाकर खाएं ।

बवासीर का आयुर्वेदिक दवा

मूली को काटकर नमक लगाकर औस में रात को छत पर रख दें । सुबह खाली पेट खाएं । मूली की रस से गुदा को धोएं । बादी बवासीर के लिए भी कर सकते है ।
bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi mein
मूली के 125 एम.एल रस में 100 ग्राम देशी घी में बनी जलेबी को एक घंटा डूबो दें । फिर जलेबी खाकर रस पी लें । एक से चार हफ्ता तक करें । मूली को घी में भूनकर भी खा सकते है ।

bawaseer bimari ka ayurvedic ilaj

गेहू के जवारे का रस ,गिलोय और ग्वारपाठा का रस 20 से 50 एम.एल सुबह खाली पेट लें ।

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

जब महिला के पेट में बच्चा पलता है, तब उस महिला के पेट का आकर धीरे धीरे बढ़ने लगती है और स्त्री के पेट के नीचले हिस्से पर खिचाव होने लगता है. साथ ही प्रेग्नेंट लड़की की त्वचा भी पूरी खीच जाती है. इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला के जांघो पर, कूल्हे पर और सीने के हिस्से पर भी काफी ज़्यादा दबाव पड़ता है.
बच्चे का जन्म होने के बाद अपने आप ही प्रेग्नेंट लड़की के अंगो पर से खिचाव कम होता है, वैसी ही लड़की की त्वचा पहले जैसी होने लगती है. बच्चे का जन्म होने के बाद त्वचा पहले जैसी तो हो जाती है लेकिन उस महिला के पेट के नीचले हिस्से में और दोनों जांघो और कूल्हे पर स्ट्रेच मार्क्स रह जाते है.
ज्यादातर स्त्रियों को ये स्ट्रेच मार्क्स बच्चे का जन्म होने के कुछ समय बाद अपने आप ही धीरे धीरे साफ़ हो जाते है. लेकिन बहुत बार ये स्ट्रेच मार्क्स अपने आप नहीं जाते है. इसीलिए आज हम आप लोगों को कुछ ऐसे तरीके के बारे में बताने जा रहे है. जिसका इस्तेमाल करके आप आप स्ट्रेच मार्क्स के निशानों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है.

डिलीवरी के बाद पेट का कालापन कैसे दूर करे

अगर आप इस स्ट्रेच मार्क्स को मिटाना चाहती है, तो ओलिव ऑइल यानि की जैतून का तेल लीजिये और अपने स्ट्रेच मार्क्स इस जैतून के तेल से मालिश कीजिये. इस तेल से रोज़ाना मालिश करने से डिलीवरी के 30 से 45 दिन के अन्दर ही सभी स्ट्रेच मार्क्स के दाग चाले जाते है. जैतून के तेल से निशान तो जाते ही है साथ ही इससे आप प्रेग्नेंट लड़की की हड्डियों पर भी मालिश कर सकते है क्यूंकि इस तेल से हड्डियां भी मजबूत होती है.

प्रसव के बाद शरीर के कालापन दूर करने के उपाय

प्रेगनेंसी के बाद होने वाले स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए सबसे पहले आलू को मिक्सर में पीसकर आलू का रस निकाल लीजिये। आलू का रस निकालने के बाद उस रस को खिचाव वाले निशानों पर लगा लीजिये। आलू का रस लगाने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दीजिये. सूखने के बाद हलके गर्म पानी से धो लीजिये। ऐसा करने से कुछ ही महीनो में स्ट्रेच मार्क्स अपने आप ही साफ़ हो जायेंगे

डिलीवरी के बाद निकला पेट अंदर करने का उपाय

मेथी के बीज पेट कम करने में काफी मददगार होते हैं. साथ ही यह महिलाओं में हार्मोन को संतुलित रख कर पेट कम करते हैं. रात के समय में 1 चम्मच मेथी के बीजों को 1 ग्लास पानी में उबालें. पानी को हल्का गुनगुना होने पर पीएं. पेट जल्दी कम हो जाएगा.

नॉर्मल डिलीवरी के बाद पेट कम करना

बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं. एक स्टडी के मुताबिक, स्तनपान कराने से शरीर में मौजूद फैट सेल्स और कैलोरीज दोनों मिलकर दूध बनाने का का काम तरते हैं. जिससे बिना कुछ करे ही वजन कम हो जाता है.

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज wound treatment in hindi

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज, wound treatment in hindi

चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।
कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

घाव का इलाज

लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं।

घाव का आयुर्वेदिक इलाज

तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

ज़ख्म का इलाज

नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है।
घाव न भरना
संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है।
पुराने घाव का इलाज
पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।

घाव सुखाने के आयुर्वेदिक इलाज

तुलसी के पत्तों का चूर्ण भुरभुराने सेया बेल के पत्तों को पीसकर लगाने से घावजल्दी भर जाते हैं।

पीलिया रोग का आयुर्वेदिक इलाज, Jaundice Treatment in hindi

Jaundice Treatment
Jaundice Treatment

आज आपको पीलिया रोग का उपचार बताने जा रहा हूँ पीलिया के मरीज इसे अवश्य एक बार आजमाये वैसे तो पीलिया रोग की आयुर्वेद में वहुत इलाज हैं जिसमे कुछ उपाय मैं आपको बता रहा हूँ

piliya rog ka ayurvedic ilaj
आधा गिलास टमाटर के रस में थोड़ा-सा काला नमक और काली मिर्च मिलाएं | इसे प्रात:काल पीने से लाभ होता है | जिगर ठीक से काम करने लगता है |

Jaundice Treatment in hindi

पीपल के पेड़ की तीन-चार नई कोपलें, अच्छी प्रकार धो कर मिश्री या चीनी के साथ मिलाकर बारीक पीस लें | इसे 200 ग्राम जल में घोलकर रोगी को दिन में दो बार पिलाने से चार-पांच दिन में पीलिया से छुटकारा मिल जाता है | पीलिया के रोगी के लिए यह एक बहुत ही सरल और प्रभावशाली उपाय है |

पीलिया रोग का आयुर्वेदिक इलाज,

फिटकरी को भूनकर उसका चूर्ण बना लें | दो से चार रत्ती तक दिन में दो अथवा तीन बार छाछ के साथ पिलाने से कुछ ही दिनों में पीलिया में आराम होता है |

Jaundice ka ayurvedic ilaj

कासनी एक प्रकार की छोटे-छोटे नीले फूलों वाली बूटी है | इसके फूलों का काढ़ा बनाकर 30 से 60 मिलीलीटर तक की मात्रा में दिन में तीन बार देने से पीलिया में लाभ होता है | इससे बढ़ी हुई तिल्ली भी ठीक होती है | पित्त प्रवाह में सुचारुता तथा जिगर और पित्ताशय को ठीक से काम करने में सहायता मिलती है |

Jaundice ka ilaj

गोखरू की जड़ का काढ़ा बनाकर पीलिया के रोगी को प्रतिदिन दो या तीन बार देने से लाभ होता है | मात्रा 30 से 60 मिलीलीटर तक हो सकती है |

पीलिया का आयुर्वेदिक इलाज,

घी कुआर का गूदा निकाल उसमें काला नमक और अदरक का रस मिलाकर प्रात:काल देने से सात-आठ दिन में पीलिया का रोगी ठीक हो जाता है |
पीलिया का अनोखा इलाज
कुटकी और निशोध दो देशी बूटियां हैं | इन दोनों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | एक चम्मच चूर्ण गर्म जल से रोगी को दें | इस प्रकार दिन में दो बार देने से शीघ्र लाभ होता है |

पीलिया रोगी को क्या नहीं खाना चाहिए

पीलिया के रोगी को तले हुए, मिर्च-मसालेदार व गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए | शराब, मांस, धूम्रपान, चाय आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए | स्वच्छ पानी को उबालकर ठण्डा करके पीना चाहिए | अशुद्ध और बासी खाद्य-पदार्थों का सेवन भी न करें
पीलिया का घरेलू इलाज
गाय का मूत्र भी बहुत फायदा करता है गाय देसी होनी चाहिए और उसका मूत्र 8तह सूती कपड़े से छानिये फिर 15से 20 पत्ते तुलसी का डाल कर गरम कीजिये 10से 15 मिनिट फिर उतार कर छान लें और शीशी में रख दें शुबह खाली पेट आधा गिलास पानी में 15 ml ये मूत्र मिलाये 3चमच शहद मिलाकर चमच से चलाए फिर पी लीजिये एक घंटा तक कुछ न खाए ।
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अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज, asthma ka ayurvedic ilaj

asthma ka ayurvedic ilaj
asthma ka ayurvedic ilaj 

अस्थमा एक फेफड़े की बीमारी है जो साँस लेने में कठिनाई का कारण बनता है। फेफड़ों में हवा के प्रवाह में रुकावट होने पर अस्थमा अटैक होता है।

अस्थमा के कारण

एलर्जी, वायु प्रदूषण, धूम्रपान और तंबाकू, श्वसन संक्रमण, जेनेटिक्स (आनुवांशिक), मौसम के कारण, मोटापा, तनाव
अस्थमा (दमा) के लक्षण
साँस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या दर्द, खाँसी, घरघराहट, लगातार सर्दी और खांसी

अस्थमा के घरेलू नुस्खे

अदरक का रस, अनार का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण का एक चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन करें।

asthma ke gharelu upchar

नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता हैं जो अस्थमा के इलाज में सहायक होता है। एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस निचोड़ लें और उसमें अपने स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पीयें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज

आंवला दमा के उपचार के लिए एक अच्छा उपाय है। आंवला को कुचलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और सेवन करें।

अस्थमा का आयुर्वेदिक नुस्खे

तीन सूखे अंजीर को धो लें और रात भर एक कप पानी में भिगोएँ। सुबह में खाली पेट अंजीर खा लें और अंजीर का पानी पीयें।
dama khansi ka ilaj
एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर रात में सोने से पहले सेवन करें। यह गले से कफ को निकालने में मदद करता है और इससे अच्छी नींद आती है।
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प्याज में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण दमा के इलाज में मदद करता है। प्याज को सलाद के रूप में या सब्जियों में पकाकर खा सकते है।
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एक गिलास गर्म दूध में जैतून का तेल और शहद को बराबर मात्रा में मिलाएं। इसमें कुछ लहसुन की कली डालकर नाश्ता करने से पहले सेवन करें।
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संतरा, पपीता, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी भी अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
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पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर उबाल लें और इसका भाप लें। आप चाहे तो इसे पी भी सकते है।
अपने आहार में अधिक ताजा फल और सब्जियों को शामिल करें।

यूरिन इंफ़ेक्शन के आयुर्वेदिक इलाज, urine infection ka ayurvedic ilaj

urine infection ka ayurvedic ilaj
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यूरिन इंफ़ेक्शन का इलाज घरेलू उपाय किया जाए तो समस्या जड़ से ख़त्म हो सकती है।

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यूरिन इंफ़ेक्शन का एक कारण है, बैक्टीरिया का जमाव। ज़्यादा पानी पीते रहने से बैक्टीरिया ब्लैडर में जमा नहीं होते हैं और इंफ़ेक्शन से बचाव होता है। दर्द, जलन और सूजन जैसी समस्या से निजात मिल जाती है।

urine infection ka desi ilaj in hindi

सेब का सिरका यूटीआई की समस्या के इलाज और गुप्तांग संबंधित अनेक समस्याओं के उपचार में काफ़ी मददगार है। 1 गिलास पानी में 2 से 3 चम्मच सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस उपाय को दिन में 3 बार करने से यूटीआई से निजात मिलेगी।

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खट्टे फलों में सिट्रिक एसिड होता है जो कि बैक्टीरिया को ख़त्म करता है। पेशाब में इंफ़ेक्शन होने पर खट्टे फलों का सेवन करें और उनका रस पिएं। नींबू, संतरा और आंवला खट्टे फलों के बढ़िया उदाहरण हैं।

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नींबू पानी पीना यूटीआई की समस्या में बहुत लाभकारी होता है।
खट्टे फलों में विटामिन सी भी होता है जो एक प्रकार का एंटी ऑक्सीडेंट है। वाइटमिन सी बॉडी से फ्री रेडिकल्स को बाहर करके इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाता है। जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

urine infection ka ayurvedic treatment in hindi

बेकिंग सोडा हमारी बॉडी में एसिड का बैलेंस बनाए रखने में काफ़ी कारगर है। यूरिन ट्रैक्ट इंफ़ेक्शन के इलाज में 1 गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर दिन में 2 बार पीना चाहिए।
4. क्रैनबेरी जूस मूत्र में संक्रमण को रोकने में अच्छा उपाय है। अगर आप इसे यूं ही न पी पाएं तो सेब के जूस में मिलाकर पी सकते हैं।

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यूरिन में इंफ़ेक्शन का उपचार अन्नानास से भी किया जा सकता है। अन्नानास गुप्तांग  के बैक्टीरिया को ख़त्म करने में असरदार है। इससे आप ऐसे ही खा सकते हैं और जूस भी पी सकते हैं।

urine infection me kya khana chahiye

लस्सी या छाछ यूटीआई की समस्या होने पर ज़रूर पीनी चाहिए। ये ब्लैडर में पनप रहे बैक्टीरिया को बाहर कर देती है। इसके अलावा पेशाब में होने वाली जलन से भी राहत देती है।यूटीआई के समय दही का प्रयोग कर सकते हैं, दही खाने से शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।
ब्लैडर में इंफ़ेक्शन होने पर प्याज का सेवन भी उत्तम है, प्याज बॉडी से टॉक्सिन और फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने में मदद करता है।

दिल धड़कन तेज होने का कारण और आयुर्वेदिक इलाज, dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj

dil ki dhadkan tez hone ka karan aur ayurvedic ilaj
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दिल की धड़कन तेज होना तथा अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज,

वास्तव में दिल की धड़कन कोई रोग नहीं है| किन्तु जब दिल तेजी से धड़कने लगता है तो मनुष्य के शरीर में कमजोरी आ जाती है, माथे पर हल्का पसीना उभर आता है तथा पैर लड़खड़ाने लगते हैं|
रोगी को लगता है, जैसे वह गिर जाएगा| दिल धड़कने की क्रिया भय, हानि की आशंका, परीक्षा में असफलता, ट्रेन का अचानक छूटना, किसी प्रिय की मृत्यु आदि घटनाओं को देखने-सुनने के बाद शुरू हो जाती है|
यह एक प्रकार की चिन्ताजन्य घबराहट होती है जिसकी वजह से दिल बड़ी तेजी से धड़कने लगता है| यदि उसी क्षण मनुष्य मन से चिन्ता तथा भय को निकाल दे तो दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
कई बार तेज दौड़-भाग करने, देर तक व्यायाम करने या रक्तचाप की अधिकता आदि के कारण भी दिल तेजी से धड़कने लगता है| यह रोग बुढ़ापे में बहुत जल्दी लग जाता है| इसलिए इस आयु में व्यक्ति कोई सदैव प्रसन्नचित्त रहना चाहिए तथा जाने-अनजाने व्यर्थ की चिन्ताओं से दूर रहना चाहिए|

तेजी से दिल धड़कने का कारण,

dil ki dhadkan tez hone ka karan

प्रत्येक स्त्री, पुरुष और बच्चे का दिल एक निश्चित गति में धड़कता रहता है| यह धड़कन मनुष्य के स्वस्थ तथा जीवित होने का लक्षण है|

अनियमित दिल की धड़कन के लक्षण

लेकिन किसी आशंका, भय या चिन्ता के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है| यदि यह बार-बार होने लगे तो समझना चाहिए कि यह दिल की धड़कन का रोग है|

पल्स रेट बढ़ने के कारण

यह रोग प्राय: उन लोगों को बहुत जल्दी होता है जो शरीर तथा हृदय दोनों से दुर्बल होते हैं| वैसे अधिक मानसिक उत्तेजना, दुःख, कष्ट, संकट, क्षुब्धता, स्नायुमंडल का कोई रोग, उत्तेजित पदार्थों का सेवन, भय, अधिक परिश्रम, दौड़ - धूप, हस्तमैथुन, स्त्री-प्रसंग आदि कारणों से यह रोग बड़ी जल्दी हो जाता है|
तेजी से दिल धड़कने की पहचान
 रोग में कलेजा जोर-जोर से धड़कने लगता है| शरीर में कमजोरी आ जाती है| कुछ लोगों को बेचैनी भी महसूस होती है|
शरीर में शुष्कता, कंठ में खुश्की, प्यास, तन्द्रा, अजीर्ण, भूख न लगना, दिल का जैसे बैठ जाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं| हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं| शरीर की प्राणवायु शिथिल हो जाती है|
सांस लेने में कठिनाई होती है| बस खाट पर लेटे रहने की इच्छा होती है| ऐसे में प्रिय व्यक्ति से बात करना भी अच्छा नहीं लगता|

तेजी से दिल धड़कने के आयुर्वेदिक इलाज

गाय के दूध में किशमिश तथा बादाम डालकर औटाएं| फिर शक्कर डालकर सहता-सहता घूंट-घूंट पी लें|
पिस्ते की लौज खाने से हृदय की धड़कन ठीक हो जाती है|
दो चम्मच प्याज के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें|
भोजन के बाद चार चम्मच अंगूर का रस पिएं|
गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर पीस लें| फिर इसमें धनिया का चूर्ण समभाग में मिलाएं| एक चम्मच चूर्ण खाकर ऊपर से आधा लीटर दूध पिएं|

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अनार के कोमल कलियों की चटनी बनाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह के समय निहार मुंह खाएं| लगभग एक सप्ताह सेवन करने से दिल की धड़कन सही रास्ते पर आ जाती है|
बेल का गूदा लेकर उसे भून लें| फिर उसमें थोड़ा-सा मक्खन या मलाई मिलाकर सहता-सहता लार सहित गले के नीचे उतारें|

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200 ग्राम सेब को छिलके सहित छोटे-छोटे टुकड़े करके आधा लीटर पानी में डाल दें| फिर इस पानी को आंच पर रखें| जब पानी जलकर एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर सेवन करें| यह दिल को मजबूत करता है|

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आंवले के चूर्ण में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद खाएं| यह दिल की धड़कन सामान्य करता है| इससे रक्तचाप में भी लाभ होता है क्योंकि दिल की धड़कन तेज होने पर रक्तचाप भी बढ़/घट जाता है|
पके पपीते का रस एक कप की मात्रा में भोजन के बाद सेवन करें|
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आधा कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन दोपहर के समय पिएं|
दिल धड़कने पर जरा-सा कपूर जीभ पर रखकर चूसें|
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आधे कप सेब के रस में चार कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|

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लाल इलायची के दानों को पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से चौथाई चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर खाएं|

heartbeat control karne ke ayurvedic ilaj

टमाटर के रस में पीपल के पेड़ के तने की छाल का 4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करें| टमाटर के रस की मात्रा आधा कप होनी चाहिए|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक नुस्खे
पानी में आधा नीबू निचोड़ें तथा उसमें दो चुटकी खाने वाला सोडा डालें| इस नीबू-पानी को पीने से दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है|

अनियमित दिल की धड़कन का आयुर्वेदिक इलाज
आधा चम्मच अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक - दोनों को पीसकर गुनगुने पानी के साथ खाएं| यह चूर्ण दिल की तेज धड़कन को सामान्य बना देता है| यह एक बेहतरीन नुस्खा माना जाता है|

अनियमित दिल की धड़कन का इलाज

अदरक का रस एक चम्मच, तुलसी के पत्तों का रस चौथाई चम्मच, लहसुन का रस दो बूंद तथा सेंधा नमक एक चुटकी - सबको अच्छी तरह मिलाकर उंगली से चाटें| चाटते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेट में लार अधिक मात्रा में जाए|
अनियमित दिल की धड़कन के लिए आयुर्वेदिक इलाज
कंधारी अनार का रस कालीमिर्च के चूर्ण तथा सेंधा नमक मिलाकर लेने से दिल की धड़कन स्वाभाविक हो जाती है|
राई पीसकर छाती पर मलने से भी दिल को काफी आराम मिलता है|

तेजी से दिल धड़कने में क्या खाएं क्या नहीं
सादा तथा सुपाच्य भोजन भूख से कम खाएं| साथ में अधिक चिकने पदार्थ न लें क्योंकि चिकनी चीजें शरीर को बल देने साथ-साथ रक्त को गाढ़ा करती हैं जो दिल धड़कने वाले रोगी के लिए हानिकारक है|

heartbeat control tips in hindi

मौसमी फल तथा मौसमी हरी सब्जियां अधिक मात्रा में सेवन करें| परन्तु ठंडी तासीर के फल तथा सब्जियां बिलकुल न खाएं| रक्तचाप की जांच कराते रहें|

heartbeat control karne ke upay

भोजन के साथ कच्ची अदरक, कच्ची प्याज तथा कच्चे चनो का इस्तेमाल अवश्य करें| अंकुरित मूंग दिल की धड़कन में बहुत लाभकारी है| मसालों में लाल मिर्च न खाकर कालीमिर्च, लौंग, जावित्री, तेजपात आदि साग-सब्जी में डालकर सेवन करें|

dil ki dhadkan tej hone par kya kare
बकरी तथा गाय का दूध अवश्य लें| बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, खजूर, चिलगोजे आदि मेवे दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखते हैं| साथ ही चिंता, शोक, निराशा एवं विषाद आदि नकारात्मक भावों से स्वयं को बचाएं|

पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज, Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj
Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक इलाज

Ginger सोंठ और बायविंडग को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की घरेलू इलाज

• बकायन और नीम के पेड़ की छाल को पीसकर पानी में डालकर लेप बनाकर पेट पर लगाने सेपेट के कीड़े मलकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
• बकायन की 20 ग्राम छाल को 2 लीटर पानी में उबालें। 750 मिलीलीटर पानी शेष रहने पर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर 3 दिनों तक 50 से 100 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज,

पारसी कयवानी बीज को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी बने चूर्ण को एक ग्राम से लेकर 5 ग्राम की मात्रा में 50-100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर एक दिन में 2 बार पेट के कीड़ों से छुटकारा मिलता है।

पेट के कीड़ो की घरेलू इलाज,

महानिम्ब के नये पत्तों को पीसकर रस निकाल लें, इसी रस को 7 मिलीलीटर से लेकर 14 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम पीने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक नुस्खे

काम्पिल्लक के फल को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण में 1 ग्राम गुड़ को मिलाकर 100 मिलीलीटर दूध को दिन में 2 बार पिलाने से लाभ होता है।
पेट के कीड़े मारने की घरेलू उपाय
खजूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर बासी होने पर शहद के साथ मिलाकर पीने से और खजूर की पत्तियों का रस 40 ग्राम और 40 ग्राम शहद के साथ मिलाकर पीने पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं।
बच्चों के पेट में कीड़े की दवा
करंज की मींगी को भूनकर 3 से 4 दिन तक खाने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े की देसी इलाज

• प्याज के 10 मिलीलीटर रस में थोड़ी-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर पिलाने से पेट के कीड़ें मिट जाते हैं।
• प्याज के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से पेट के अन्दर के चुन्ने कीड़े मर जाते हैं।

Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

• प्याज को निचोड़कर प्राप्त रस को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में पीने से बच्चों के पेट मे मौजूद कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
• प्याज का रस एक चम्मच की मात्रा में 2-2 घण्टे के अन्तराल के बाद पीने से पेट के कीड़े मरते हैं और पेट का दर्द भी दूर होता है।
• प्याज का आधा चम्मच रस 2 से 3 दिन तक बच्चों को देने से पेट के कीड़े और दर्द नष्ट होते हैं।