Piles बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज, bawaseer ka ayurvedic ilaj

bawaseer ka ayurvedic ilaj
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दुनिया में बहुत लोग बवासीर से परेशान है । इंसान का उठना बैठना इसके कारण मुशकिल हो जाता । कई को बहुत ही असहनीय दर्द की अनुभूती होती है ।
इस रोग का कारण खट्टी तले पदार्थ ,तेज मिर्च मसालेदार वस्तुएं ,कब्ज आदि है ।

bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi me

ऐलोपेथी में इसका इलाज सिर्फ आप्रेशन है । लेकिन उसके बावजूद भी यह रोग दोबारा घेर लेता है । आखिर कितने आप्रेशन करवाए जाएं । लेकिन आपको घबराने की जरूरत नही । आयुर्वेद में इस रोग की बहुत सफल औष्धियाँ है । जो इस रोग को जड़ मूल से ठीक कर देती है । मैं आपको घरेलु नुस्खे बता रहा हुँ जिनकी मदद से आपको काफी राहत मिलेगी । अगर आपका रोग पुराना है या आप्रेशन करवा लिया है या अन्य किसी प्रकार की चिकित्सा से आराम नही हुआ तो आप बेझिझक मुझसे संपर्क कर सकते है ।

बवासीर नाशक 10 घरेलु इलाज

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50 ग्राम तिल को चबाकर खाने के बाद ऊपर से दही खा लेने से रक्तस्राव रूकता है ।

khooni bawaseer ka ayurvedic ilaj

मेथी बीज दूध में उबालकर लेने खूनी बवासीर में लाभ होता है ।

badi bawaseer ka ayurvedic ilaj

10 ग्राम ईशबगोल भुसी रात को दूध से लें । इससे दोनों बवासीर में लाभ होगा ।
पुरानी बवासीर का इलाज
एक कप मूली के रस में देशी घी मिलाकर सुबह- शाम पीएं । मूली का सलाद भी ले सकते है ।

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करेले का रस सुबह खाली पेट लें ।
खुनी बवासीर का रामबाण इलाज
नारियल की जटा जलाकर ,समभाग फिटकरी का फूला ,मिश्री मिलाकर 10 ग्राम तक नारियल के पानी या दूध पानी की लस्सी से लें ।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज

गुनगुना दूध में नीबू निचोड़ कर पीएं ।नीबू काटकर उसमें कत्था लगाकर खाएं ।

बवासीर का आयुर्वेदिक दवा

मूली को काटकर नमक लगाकर औस में रात को छत पर रख दें । सुबह खाली पेट खाएं । मूली की रस से गुदा को धोएं । बादी बवासीर के लिए भी कर सकते है ।
bawaseer ka ayurvedic ilaj hindi mein
मूली के 125 एम.एल रस में 100 ग्राम देशी घी में बनी जलेबी को एक घंटा डूबो दें । फिर जलेबी खाकर रस पी लें । एक से चार हफ्ता तक करें । मूली को घी में भूनकर भी खा सकते है ।

bawaseer bimari ka ayurvedic ilaj

गेहू के जवारे का रस ,गिलोय और ग्वारपाठा का रस 20 से 50 एम.एल सुबह खाली पेट लें ।

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

बच्चे के जन्म के बाद पेट पर पड़े निशानों को दूर करने के आयुर्वेदिक इलाज

जब महिला के पेट में बच्चा पलता है, तब उस महिला के पेट का आकर धीरे धीरे बढ़ने लगती है और स्त्री के पेट के नीचले हिस्से पर खिचाव होने लगता है. साथ ही प्रेग्नेंट लड़की की त्वचा भी पूरी खीच जाती है. इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला के जांघो पर, कूल्हे पर और सीने के हिस्से पर भी काफी ज़्यादा दबाव पड़ता है.
बच्चे का जन्म होने के बाद अपने आप ही प्रेग्नेंट लड़की के अंगो पर से खिचाव कम होता है, वैसी ही लड़की की त्वचा पहले जैसी होने लगती है. बच्चे का जन्म होने के बाद त्वचा पहले जैसी तो हो जाती है लेकिन उस महिला के पेट के नीचले हिस्से में और दोनों जांघो और कूल्हे पर स्ट्रेच मार्क्स रह जाते है.
ज्यादातर स्त्रियों को ये स्ट्रेच मार्क्स बच्चे का जन्म होने के कुछ समय बाद अपने आप ही धीरे धीरे साफ़ हो जाते है. लेकिन बहुत बार ये स्ट्रेच मार्क्स अपने आप नहीं जाते है. इसीलिए आज हम आप लोगों को कुछ ऐसे तरीके के बारे में बताने जा रहे है. जिसका इस्तेमाल करके आप आप स्ट्रेच मार्क्स के निशानों से हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है.

डिलीवरी के बाद पेट का कालापन कैसे दूर करे

अगर आप इस स्ट्रेच मार्क्स को मिटाना चाहती है, तो ओलिव ऑइल यानि की जैतून का तेल लीजिये और अपने स्ट्रेच मार्क्स इस जैतून के तेल से मालिश कीजिये. इस तेल से रोज़ाना मालिश करने से डिलीवरी के 30 से 45 दिन के अन्दर ही सभी स्ट्रेच मार्क्स के दाग चाले जाते है. जैतून के तेल से निशान तो जाते ही है साथ ही इससे आप प्रेग्नेंट लड़की की हड्डियों पर भी मालिश कर सकते है क्यूंकि इस तेल से हड्डियां भी मजबूत होती है.

प्रसव के बाद शरीर के कालापन दूर करने के उपाय

प्रेगनेंसी के बाद होने वाले स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए सबसे पहले आलू को मिक्सर में पीसकर आलू का रस निकाल लीजिये। आलू का रस निकालने के बाद उस रस को खिचाव वाले निशानों पर लगा लीजिये। आलू का रस लगाने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दीजिये. सूखने के बाद हलके गर्म पानी से धो लीजिये। ऐसा करने से कुछ ही महीनो में स्ट्रेच मार्क्स अपने आप ही साफ़ हो जायेंगे

डिलीवरी के बाद निकला पेट अंदर करने का उपाय

मेथी के बीज पेट कम करने में काफी मददगार होते हैं. साथ ही यह महिलाओं में हार्मोन को संतुलित रख कर पेट कम करते हैं. रात के समय में 1 चम्मच मेथी के बीजों को 1 ग्लास पानी में उबालें. पानी को हल्का गुनगुना होने पर पीएं. पेट जल्दी कम हो जाएगा.

नॉर्मल डिलीवरी के बाद पेट कम करना

बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं. एक स्टडी के मुताबिक, स्तनपान कराने से शरीर में मौजूद फैट सेल्स और कैलोरीज दोनों मिलकर दूध बनाने का का काम तरते हैं. जिससे बिना कुछ करे ही वजन कम हो जाता है.

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज wound treatment in hindi

ज़ख्मों और घावों के आयुर्वेदिक इलाज, wound treatment in hindi

चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।
कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

घाव का इलाज

लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं।

घाव का आयुर्वेदिक इलाज

तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

ज़ख्म का इलाज

नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है।
घाव न भरना
संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है।
पुराने घाव का इलाज
पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।

घाव सुखाने के आयुर्वेदिक इलाज

तुलसी के पत्तों का चूर्ण भुरभुराने सेया बेल के पत्तों को पीसकर लगाने से घावजल्दी भर जाते हैं।

हिलते दांतों का आयुर्वेदिक इलाज Loose Teeth treatment in Hindi


Loose Teeth treatment

दांतों की ढीलापन आमतौर पर पैरीयोडोंटम नामक बीमारी के कारण होता है। यह मसूड़ों के कारण होता है, जो दांत के आसपास के ऊतकों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में दांतों से जुड़े मुलायम फाइब्रस टिश्‍यू, जो अंदर से हड्डी से कनेक्‍ट होते हैं, ज्‍यादा मुलायम हो जाते हैं। जिससे दांतों में हिलने की समस्‍या होने लगती है। यह समस्‍या दांतों को बहुत ज्‍यादा रगड़ने, गम क्‍लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है।

हिलते दांतों का इलाज

Loose Teeth  treatment in Hindi
Loose Teeth  treatment in Hindi 


काली मिर्च और हल्‍दी का पेस्ट --
इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्‍या होने पर काली मिर्च और हल्‍दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्‍ट बनाना लें। इस पेस्‍ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्‍ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्‍या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।

dant dard ka ayurvedic ilaj

पुदीने का तेल
पुदीने के तेल में दांतों की समस्‍याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्‍टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्‍या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्‍छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्‍ला करने के लिए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

Loose Teeth treatment

सरसों का तेल और नमक
प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्‍ट को लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्‍द ही आराम मिलने लगेगा।

Home Remedies For Loose Teeth in Hindi

दांत मजबूत करने के घरेलू उपाय- आंवला

आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्‍ला कर लें या इसे पी लें।

मसूड़ों को मजबूत करने के उपाय

लौंग के तेल के प्रयोग
लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्‍तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्‍यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।

दांतों का हिलना कैसे बंद करें

अजवायन की पत्तियों का तेल
आजवाइन की पत्‍ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्‍के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है।
दांतों को मजबूत बनाने के उपाय नमक का प्रयोग करें
नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्‍मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods


सर्दियों में लोगों को ठंड से बचने के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं। गर्म कपड़ों के साथ ही आपको अपने आहार पर ध्यान देना जरुरी है। कई लोगों का रक्तचाप सर्दियों में कम हो जाता है। खून की आम्लाता बढती है। ऐसे लोग ज्यादा गर्म कपडे पेहेनते हैं पर यह सही उपाय नहीं है। उन्हें अंदरूनी गर्मी की जरुरत होती है।

सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ(Best heat generating for Winter foods)

ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में गर्मी पैदा करें सर्दियों में खाने से सर्दियां अच्छी लगने लगती है। यहाँ पर कुछ ऐसे पदार्थ दिए गए हैं।

सर्दियों में सेहत के लिए लहसुन (Garlic – Winter foods)

जिन लोगों को उच्च कोलेस्ट्रोल का खतरा होता है उन्हें डॉक्टर लहसुन खाने की सलाह देते हैं। लहसुन से शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दियों में आप फ्लू और खाँसी से परेशान हो सकते हैं। लहसुन कीटाणुरोधी होता है। गले की खराश कम करने के लिए लहसुन की 2-3 कलियाँ चबाकर खाएं।

शरीर को अंदरुनी रूप से गर्म रखने के लिए शहद (Honey – Winter foods)

सर्दियों में जुकाम और खाँसी के लिए दादी माँ एक चम्मच शहद लेने की सलाह देती हैं। शहद से शरीर की प्रतिकार शक्ति बढती है। सर्दियों में हर दिन 1 चम्मच शहद लेने से आप सर्दियों से सुरक्षित रहते हैं। शहद में प्राकृतिक शक्कर होती है और शहद खाने से साधारण चीनी के हानिकारक परिणाम नहीं दिखते।

शरीर में गर्मी के लिए अदरक (Ginger – Winter foods)
अदरक आपके भोजन का स्वाद बढाने के काम आता है। यह सर्दियों में आपके शरीर को गरम रखता है। कच्चा अदरक या सुखा अदरक नमक के साथ खाने से सर्दियों के दौरान आपका हाजमा सही रहता है। चाय में अदरक डालकर पिने से शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दी का इलाज दालचीनी से (Cinnamon – Winter foods)

दालचीनी स्वाद में मीठी होती है और शरीर में गर्मी बढ़ाती है। खाने में दालचीनी डालने से खाने का स्वाद बढ़ता है। चाय, कॉफ़ी में दालचीनी डालकर ली जा सकती है।

सर्दी के उपाय सूखा मेवा से (Nuts – Winter foods)

अक्रोड, सिंगदाना और बादाम खाने से शरीर को विटामिन, तंतु मिलते हैं और शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दियों में सेहत के लिए मेथी (Fenugreek / Methi – Winter foods)

यह एक हरी पत्तेदार सब्जी है जो आयरन और फोलिक एसिड (iron and folic acid) से भरपूर होती है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) का उत्पादन बढाने में सहायता करती है। मेथी ठण्ड में पाई जाने वाली एक काफी जानी मानी सब्जी है जिसका आप कई तरीकों से प्रयोग कर सकते हैं। इससे कई तरह के नमकीन और पराठे बनाए जा सकते हैं तथा इसका प्रयोग अन्य सब्जियों जैसे आलू, गाजर और मटर के साथ किया जा सकता है।

द्रव्य और पेय पदार्थ (Fluids and beverages – Winter foods)
ठण्ड का समय सूप (soup), कॉफ़ी (coffee), चाय तथा अदरक, लौंग तथा दालचीनी के साथ मसाला चाय के सेवन का होता है। ये शरीर को हाइड्रेटेड (hydrated) रखते हैं तथा रक्त के संचार में इजाफा करते हैं।

सर्दी का इलाज सूखे फल और मेवे में (Dry Fruits And Nuts – Winter foods)

सूखे फल जैसे खुबानी (apricot), खजूर, किशमिश, बादाम, काजू, मूंगफली तथा अखरोट ठण्ड के समय आपके शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। ये विटामिन इ (vitamin E), मैग्नीशियम (magnesium) तथा जिंक (zinc) से भरपूर होते हैं तथा आपको बेचैनी, तनाव और थकान से दूर रखते हैं।

अल्सर रोग का आयुर्वेदिक इलाज, alsar ka ayurvedic ilaj

alsar ka ayurvedic ilaj
alsar ka ayurvedic ilaj

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए तथा इसके बाद प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।

अल्सर रोग का आयुर्वेदिक इलाज

अल्सर रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को नियमित अंतराल पर ठंडा दूध पीना चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

ulcer me kya khana chahiye

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले भोजन करने का समय बनाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तेजक पदार्थ, मिर्च मसालेदार भोजन, मांसाहारी पदार्थ का सेवन करना छोड़ देना चाहिए क्योंकि इन पदार्थों का सेवन करने से रोग की अवस्था और भी गम्भीर हो सकती है।

alsar ka ayurvedic ilaj

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में ठंडे पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि उसका पेट साफ हो सके और कब्ज की शिकायत हो तो दूर हो सके। इस प्रकार से उपचार करने से अल्सर रोग ठीक हो जाता है।

ulcer mein kya kya khaye

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट पर प्रतिदिन ठंडे कपड़े की लपेट का इस्तेमाल करना चाहिए।

ulcer kaise thik hota hai

अल्सर रोग को ठीक करने के लिए गैस्ट्रो-हैपेटिक लपेट का उपयोग करना चाहिए।
पेट पर मिट्टी का लेप करने से पेट से गैस बाहर निकल जाती है जिसके परिणामस्वरूप अल्सर रोग ठीक हो जाता है।

ulcer ka ramban ilaj

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन ठंडे पानी से कटि-स्नान करना चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

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अल्सर रोग से पीड़ित रोगी के पेट में अधिक जलन हो रही हो तो उसके पेट पर तुरंत बर्फ की थैली का प्रयोग करना चाहिए। इस प्रकार का उपचार करने से पेट में जलन होना तथा दर्द होना बंद हो जाता है।

alsar ke upay in hindi

अल्सर रोग से पीड़ित रोगी को शारीरिक तथा मानसिक रूप से अधिक आराम करना चाहिए तथा प्राकृतिक चिकित्सा से अपना उपचार करना चाहिए तभी यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

यूरिन इंफ़ेक्शन के आयुर्वेदिक इलाज, urine infection ka ayurvedic ilaj

urine infection ka ayurvedic ilaj
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यूरिन इंफ़ेक्शन का इलाज घरेलू उपाय किया जाए तो समस्या जड़ से ख़त्म हो सकती है।

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यूरिन इंफ़ेक्शन का एक कारण है, बैक्टीरिया का जमाव। ज़्यादा पानी पीते रहने से बैक्टीरिया ब्लैडर में जमा नहीं होते हैं और इंफ़ेक्शन से बचाव होता है। दर्द, जलन और सूजन जैसी समस्या से निजात मिल जाती है।

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सेब का सिरका यूटीआई की समस्या के इलाज और गुप्तांग संबंधित अनेक समस्याओं के उपचार में काफ़ी मददगार है। 1 गिलास पानी में 2 से 3 चम्मच सेब का सिरका और आधा चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस उपाय को दिन में 3 बार करने से यूटीआई से निजात मिलेगी।

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खट्टे फलों में सिट्रिक एसिड होता है जो कि बैक्टीरिया को ख़त्म करता है। पेशाब में इंफ़ेक्शन होने पर खट्टे फलों का सेवन करें और उनका रस पिएं। नींबू, संतरा और आंवला खट्टे फलों के बढ़िया उदाहरण हैं।

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नींबू पानी पीना यूटीआई की समस्या में बहुत लाभकारी होता है।
खट्टे फलों में विटामिन सी भी होता है जो एक प्रकार का एंटी ऑक्सीडेंट है। वाइटमिन सी बॉडी से फ्री रेडिकल्स को बाहर करके इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाता है। जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

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बेकिंग सोडा हमारी बॉडी में एसिड का बैलेंस बनाए रखने में काफ़ी कारगर है। यूरिन ट्रैक्ट इंफ़ेक्शन के इलाज में 1 गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर दिन में 2 बार पीना चाहिए।
4. क्रैनबेरी जूस मूत्र में संक्रमण को रोकने में अच्छा उपाय है। अगर आप इसे यूं ही न पी पाएं तो सेब के जूस में मिलाकर पी सकते हैं।

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यूरिन में इंफ़ेक्शन का उपचार अन्नानास से भी किया जा सकता है। अन्नानास गुप्तांग  के बैक्टीरिया को ख़त्म करने में असरदार है। इससे आप ऐसे ही खा सकते हैं और जूस भी पी सकते हैं।

urine infection me kya khana chahiye

लस्सी या छाछ यूटीआई की समस्या होने पर ज़रूर पीनी चाहिए। ये ब्लैडर में पनप रहे बैक्टीरिया को बाहर कर देती है। इसके अलावा पेशाब में होने वाली जलन से भी राहत देती है।यूटीआई के समय दही का प्रयोग कर सकते हैं, दही खाने से शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।
ब्लैडर में इंफ़ेक्शन होने पर प्याज का सेवन भी उत्तम है, प्याज बॉडी से टॉक्सिन और फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने में मदद करता है।

पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज, Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj
Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक इलाज

Ginger सोंठ और बायविंडग को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की घरेलू इलाज

• बकायन और नीम के पेड़ की छाल को पीसकर पानी में डालकर लेप बनाकर पेट पर लगाने सेपेट के कीड़े मलकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
• बकायन की 20 ग्राम छाल को 2 लीटर पानी में उबालें। 750 मिलीलीटर पानी शेष रहने पर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर 3 दिनों तक 50 से 100 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

पेट के कीड़ो की आयुर्वेदिक इलाज,

पारसी कयवानी बीज को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी बने चूर्ण को एक ग्राम से लेकर 5 ग्राम की मात्रा में 50-100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर एक दिन में 2 बार पेट के कीड़ों से छुटकारा मिलता है।

पेट के कीड़ो की घरेलू इलाज,

महानिम्ब के नये पत्तों को पीसकर रस निकाल लें, इसी रस को 7 मिलीलीटर से लेकर 14 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम पीने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक नुस्खे

काम्पिल्लक के फल को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण में 1 ग्राम गुड़ को मिलाकर 100 मिलीलीटर दूध को दिन में 2 बार पिलाने से लाभ होता है।
पेट के कीड़े मारने की घरेलू उपाय
खजूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर बासी होने पर शहद के साथ मिलाकर पीने से और खजूर की पत्तियों का रस 40 ग्राम और 40 ग्राम शहद के साथ मिलाकर पीने पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं।
बच्चों के पेट में कीड़े की दवा
करंज की मींगी को भूनकर 3 से 4 दिन तक खाने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

पेट के कीड़े की देसी इलाज

• प्याज के 10 मिलीलीटर रस में थोड़ी-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर पिलाने से पेट के कीड़ें मिट जाते हैं।
• प्याज के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से पेट के अन्दर के चुन्ने कीड़े मर जाते हैं।

Pet ke Keede ka Ayurvedic ilaj

• प्याज को निचोड़कर प्राप्त रस को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में पीने से बच्चों के पेट मे मौजूद कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
• प्याज का रस एक चम्मच की मात्रा में 2-2 घण्टे के अन्तराल के बाद पीने से पेट के कीड़े मरते हैं और पेट का दर्द भी दूर होता है।
• प्याज का आधा चम्मच रस 2 से 3 दिन तक बच्चों को देने से पेट के कीड़े और दर्द नष्ट होते हैं।