बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है What is needed to create a Child born

बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है What is needed to create a Child born


पुरुष का वीर्य और औरत का गर्भ! लेकिन रुकिए ... सिर्फ गर्भ? नहीं... नहीं...!!!
एक ऐसा शरीर जो इस क्रिया के लिए तैयार हो।
जबकि वीर्य के लिए 13 साल और 70 साल का वीर्य भी चलेगा।
लेकिन गर्भाशय का मजबूत होना अति आवश्यक है, इसलिए सेहत भी अच्छी होनी चाहिए।
एक ऐसी स्त्री का गर्भाशय जिसको बाकायदा हर महीने समयानुसार माहवारी (Period) आती हो।
जी हाँ !
वही माहवारी जिसको सभी स्त्रियाँ हर महीने बर्दाश्त करती हैं।बर्दाश्त इसलिए क्योंकि महावारी (Period) उनका Choice नहीं है।
यह कुदरत के द्वारा दिया गया एक नियम है।
वही महावारी जिसमें शरीर पूरा अकड़ जाता है, कमर लगता है टूट गयी हो, पैरों की पिण्डलियाँ फटने लगती हैं, लगता है पेड़ू में किसी ने पत्थर ठूँस दिये हों, दर्द की हिलोरें सिहरन पैदा करती हैं।
ऊपर से लोगों की घटिया मानसिकता की वजह से इसको छुपा छुपा के रखना अपने आप में किसी जँग से कम नहीं।

बच्चा पैदा करने के लिए क्या आवश्यक है

बच्चे को जन्म देते समय असहनीय दर्द को बर्दाश्त करने के लिए मानसिक और शारीरिक दोनो रूप से तैयार हों।
बीस हड्डियाँ एक साथ टूटने जैसा दर्द सहन करने की क्षमता से परिपूर्ण हों।

गर्भवती होने के लिए क्या करना चाहिए

गर्भधारण करने के बाद शुरू के 3 से 4 महीने जबरदस्त शारीरिक और हार्मोनल बदलाव के चलते उल्टियाँ, थकान, अवसाद के लिए मानसिक रूप से तैयार हों।
5वें से 9वें महीने तक अपने बढ़े हुए पेट और शरीर के साथ सभी काम यथावत करने की शक्ति हो।
गर्भधारण के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में तरह तरह के हर दूसरे तीसरे दिन इंजेक्शन लगवानें की हिम्मत रखती हों।
प्रसव पीड़ा को दो-चार, छः घंटे के अलावा, दो दिन, तीन दिन तक बर्दाश्त कर सकने की क्षमता हो। और अगर फिर भी बच्चे का आगमन ना हो तो गर्भ को चीर कर बच्चे को बाहर निकलवाने की हिम्मत रखती हों।
गर्भ ठहरने के लिए क्या करें
अपने खूबसूरत शरीर में Stretch Marks और Operation का निशान ताउम्र अपने साथ ढोने को तैयार हों। कभी कभी प्रसव के बाद दूध कम उतरने या ना उतरने की दशा में तरह-तरह के काढ़े और दवाई पीने का साहस रखती हों।
जो अपनी नीन्द को दाँव पर लगा कर दिन और रात में कोई फर्क ना करती हो। 3 साल तक सिर्फ बच्चे के लिए ही जीने की शर्त पर गर्भधारण के लिए राजी होती हैं।

बच्चा पैदा करने के लिए क्या करना चाहिए

गर्भ में आने के बाद एक स्त्री की यही मनोदशा होती है जिसे एक पुरुष शायद ही कभी समझ पाये। औरत तो स्वयं अपने आप में एक शक्ति है, बलिदान है।
इतना कुछ सहन करतें हुए भी वह तुम्हारें अच्छे-बुरे, पसन्द-नापसन्द का ख्याल रखती है।

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods

सर्दियों में शरीर को गरम रखने के लिए खाद्य पदार्थ Winter foods


सर्दियों में लोगों को ठंड से बचने के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं। गर्म कपड़ों के साथ ही आपको अपने आहार पर ध्यान देना जरुरी है। कई लोगों का रक्तचाप सर्दियों में कम हो जाता है। खून की आम्लाता बढती है। ऐसे लोग ज्यादा गर्म कपडे पेहेनते हैं पर यह सही उपाय नहीं है। उन्हें अंदरूनी गर्मी की जरुरत होती है।

सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ(Best heat generating for Winter foods)

ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में गर्मी पैदा करें सर्दियों में खाने से सर्दियां अच्छी लगने लगती है। यहाँ पर कुछ ऐसे पदार्थ दिए गए हैं।

सर्दियों में सेहत के लिए लहसुन (Garlic – Winter foods)

जिन लोगों को उच्च कोलेस्ट्रोल का खतरा होता है उन्हें डॉक्टर लहसुन खाने की सलाह देते हैं। लहसुन से शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दियों में आप फ्लू और खाँसी से परेशान हो सकते हैं। लहसुन कीटाणुरोधी होता है। गले की खराश कम करने के लिए लहसुन की 2-3 कलियाँ चबाकर खाएं।

शरीर को अंदरुनी रूप से गर्म रखने के लिए शहद (Honey – Winter foods)

सर्दियों में जुकाम और खाँसी के लिए दादी माँ एक चम्मच शहद लेने की सलाह देती हैं। शहद से शरीर की प्रतिकार शक्ति बढती है। सर्दियों में हर दिन 1 चम्मच शहद लेने से आप सर्दियों से सुरक्षित रहते हैं। शहद में प्राकृतिक शक्कर होती है और शहद खाने से साधारण चीनी के हानिकारक परिणाम नहीं दिखते।

शरीर में गर्मी के लिए अदरक (Ginger – Winter foods)
अदरक आपके भोजन का स्वाद बढाने के काम आता है। यह सर्दियों में आपके शरीर को गरम रखता है। कच्चा अदरक या सुखा अदरक नमक के साथ खाने से सर्दियों के दौरान आपका हाजमा सही रहता है। चाय में अदरक डालकर पिने से शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दी का इलाज दालचीनी से (Cinnamon – Winter foods)

दालचीनी स्वाद में मीठी होती है और शरीर में गर्मी बढ़ाती है। खाने में दालचीनी डालने से खाने का स्वाद बढ़ता है। चाय, कॉफ़ी में दालचीनी डालकर ली जा सकती है।

सर्दी के उपाय सूखा मेवा से (Nuts – Winter foods)

अक्रोड, सिंगदाना और बादाम खाने से शरीर को विटामिन, तंतु मिलते हैं और शरीर में गर्मी बढती है।

सर्दियों में सेहत के लिए मेथी (Fenugreek / Methi – Winter foods)

यह एक हरी पत्तेदार सब्जी है जो आयरन और फोलिक एसिड (iron and folic acid) से भरपूर होती है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) का उत्पादन बढाने में सहायता करती है। मेथी ठण्ड में पाई जाने वाली एक काफी जानी मानी सब्जी है जिसका आप कई तरीकों से प्रयोग कर सकते हैं। इससे कई तरह के नमकीन और पराठे बनाए जा सकते हैं तथा इसका प्रयोग अन्य सब्जियों जैसे आलू, गाजर और मटर के साथ किया जा सकता है।

द्रव्य और पेय पदार्थ (Fluids and beverages – Winter foods)
ठण्ड का समय सूप (soup), कॉफ़ी (coffee), चाय तथा अदरक, लौंग तथा दालचीनी के साथ मसाला चाय के सेवन का होता है। ये शरीर को हाइड्रेटेड (hydrated) रखते हैं तथा रक्त के संचार में इजाफा करते हैं।

सर्दी का इलाज सूखे फल और मेवे में (Dry Fruits And Nuts – Winter foods)

सूखे फल जैसे खुबानी (apricot), खजूर, किशमिश, बादाम, काजू, मूंगफली तथा अखरोट ठण्ड के समय आपके शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। ये विटामिन इ (vitamin E), मैग्नीशियम (magnesium) तथा जिंक (zinc) से भरपूर होते हैं तथा आपको बेचैनी, तनाव और थकान से दूर रखते हैं।

POWER OF YOGA Mudras

POWER OF YOGA Mudras
POWER OF YOGA Mudras


As stated above, Mudras are a powerful yogic tool for bringing the body into balance. The key to health is living in harmony with our inner nature and with Nature as a whole. Health is not an objective, but a holistic approach where body and mind are integrated with the inner self.

The answer to every query and conflict lies within us. YOGA is not only a study of the Sutras; it is the study of Self. No matter how many books you have read or how many trainings you have completed, nothing makes real sense until the teachings become experience. There are no shortcuts. Go within. Nothing has the greatest power to heal but Self.

YOGA hand Mudras

Mudra is a therapeutic modality that means a posture, or seal. Mudras are a nonverbal mode of communication and self-expression, consisting of hand gestures, finger movements, and body postures. They arouse the etheric body’s latent energy, and all of the dormant and passive nerve cells of the brain are awakened and stimulated into action. Mudras promote efficiency in the functioning of the organs and organ systems of the physical body. Time, space, and observer are the three important factors in the practice of Mudras. To derive the full benefit of Mudras, practitioners should observe physical cleanliness; eat pure static and healthy food; and practice purity of thoughts, speech, and actions. The ideal times to practice are at dawn and dusk, but one should aim to perform Mudras three times a day, holding them for 30 seconds to five minutes each time, depending on how many Mudras you are performing.

Mudras are a combination of subtle physical movements which alter mood, attitude and perception. And which deepen awareness and concentration. A Mudra may involve the whole body in a combination of Asana, Pranayama, Bandha and Visualization techniques, or it may be a simple hand position. Mudras are higher practices which lead to the awakening of the Pranas, Chakras and Kundalini. It establishes the pranic balance within the koshas and enables the redirection of subtle energy to the upper chakras inducing a higher state of consciousness. Each Mudra sets up a different link and has a corresponding different effect on the body, mind and prana.

The YOGA Mudras can be categorised into five groups depending on the body part we use for the practice.

YOGA Mudras list

These five groups are:
• Hasta (Hand Mudras)
• Mana (Head Mudras)
• Kaya (Postural Mudras)
• Bandha (Lock Mudras)
• Adhara (Perineal Mudras)

YOGA is more than just about the asanas wherein you twist your body or practice difficult asanas. There are a lot of other ancient techniques that work in the YOGA. The Sanskrit word Mudra is referred as ‘gesture’ or ‘attitude’. Mudras can be described as psychic, emotional, devotional and aesthetic gestures or attitudes. Ancient yogis had described Mudras as attitudes of energy flow, intended to link individual pranic force with universal or cosmic force.

Mudra for strong will power

The use of Mudras adjusts the flow of energy affecting the balance of air, fire, water, earth, ether and facilitate healing with the restoration of health.

Mudra for psychic powers

Diseases in our body are caused due to an imbalance in the body, which in turn is caused by lack or excess of any of the five elements - Air, Water, Fire, Earth and space. Our fingers have the characteristics of these elements and each of these five elements serves a specific and important function within the body. When a finger representing an element is brought into contact with the thumb, that element is brought into balance. Therefore, the disease caused by the imbalance is cured.

स्‍वाइन फ्लू के लक्षण और इससे बचने के घरेलू उपचार


स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है जो एच-1 एन -1 वायरस के द्वारा होता है, जिसके लक्षण सामान्य सर्दी जुकाम जैसे ही होते है।  इसमें गले में खराश , नाक बहना या बंद होना , बुखार , सिरदर्द , शरीर में दर्द , ठंड लगना , पेट में दर्द , कभी-कभी दस्त व उल्टी आदि।

संक्रमित व्यक्ति के खांसने या उसे छींक आने से निकले द्रव की बूंदों से ये फैलता है।   इन्फेक्शन लगने पर एक से सात दिनों में लक्षण उत्पन्न हो जाते है। swine flu ke gharelu nuskhe अपनाने से बहुत लाभ होता है जानिये इनके बारे में।

स्वाइन फ्लू के घरेलु  नुस्खे

डेढ़ कप पानी में तीन चार तुलसी के पत्ते , चार काली मिर्च , आधा चम्मच हल्दी  पाउडर , अदरक , जीरा व थोड़ी चीनी डालकर पानी एक कप रह जाने तक उबालें फिर इसमें थोडा नींबू का रस डालकर गुनगुना सेवन करें . दिन में 2-3 बार ले सकते है।

अमृतधारा की दो बूँद रुमाल या रुई पर लगाकर  बार बार सूंघते रहें।

कपूर , इलायची व लौंग को पीसकर मिलाकर छोटी पोटली बनाकर सूंघते रहें। नाक गले और फेफड़ों को इन्फेक्शन से बचाने का उत्तम उपाय है।

तुलसी के तीन चार पत्ते रोज सुबह खाएं। तुलसी के पत्ते इन्फेक्शन से बचाते है। फेफड़ों और गले को ठीक रखने में मदद करते है।

 ताजा गिलोय का रस चार चम्मच रोज पियें। गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते है।

 गिलोय काढ़ा बनाने की विधि इस प्रकार है :-
गिलोय बेल की एक फुट लम्बी डंडी के टुकड़े और पांच तुलसी के पत्ते दो गिलास पानी में डाल कर उबालें। आधा रह जाने पर थोड़ा ठंडा हो जाये तब छान लें। इसमें सेंधा नमक और काली मिर्च डाल कर गुनगुना पी लें। दिन में एक बार लेने से इम्युनिटी बढ़ती है। बहुत फायदेमंद है।

दिन में तीन बार नाक में तिल के तेल की दो दो बूँद डाले।

ग्वारपाठा ( Aloe vera ) का गूदा एक चम्मच रोज ले। ये इम्युनिटी बढ़ाता है और जाइंट्स के दर्द में आराम दिलाता है।

आंवले का रोजाना किसी भी रूप में सेवन करें। आंवले से भरपूर विटामिन “C ” मिलता है जो आपको हर प्रकार के इन्फेक्शन से बचाता है।

अपने हाथ बार बार साबुन से अच्छे से धोएँ। विशेष कर यदि आप घर से बाहर जाकर आये हों। हाथों के माध्यम से इन्फेक्शन लगने की सम्भावना ज्यादा होती है।

इनमे से जो भी उपाय कर सकते है आपको करने चाहिए। इन swine flu ke gharelu upay  से आप अवश्य ठीक रह पाएँगे।

इन उपायों से आराम नहीं आए तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें .

रोजाना पिएंगे दालचीनी वाला दूध तो नहीं होगी बीमारी

दालचीनी वाले दूध को पीने के फायदा
दालचीनी वाले दूध को पीने के फायदा

दूध अपने आप में पौष्टिक और स्वास्थवर्धक होता है। लेकिन जब हम दूध में कुछ आयुवेर्दिक चीजों को डालते हैं तब इससे दूध के फायदे दोगुने हो जाते हैं।

हम बात कर रहें दूध में दालचीनी का चूर्ण को मिलाकर पीने की। दूध में दालचीनी चूर्ण को मिलाकर पीने से कई खतरनाक बीमारियां खत्म हो जाती है।

आइए जानते हैं दालचीनी वाले दूध को पीने के फायदों के बारे में...

कैसे बनाए दालचीनी वाला दूध?
जब आप दूध में दालचीनी के चूर्ण को मिलाते हैं तब दूध के अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण तेजी से बढ़ जाते हैं। जिसकी वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। और यह मधुमेह, चेहरे की समस्या और मोटापा आदि जैसी समस्याओं को भी ठीक कर देता है। इसे बनाने का बहुत ही आसान तरीका है।

 एक कप गरम दूध में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण और एक चम्मच शहद को डालकर घोल लें और इसका सेवन करें।

दालचीनी वाले दूध के फायदे  
जिन लोगों को हड्डियों में दर्द और कमजोरी रहती हो तो वे दूध में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण और एक चम्मच शहद को मिलाकर रोज सेवन करें। इस उपाय से कमजोर हड्डियों में ताकत आती है। इसके अलावा यह गठिया की समस्या को भी ठीक करता है।
कैंसर जैसी घातक और जान लेवा बीमारी से बचने के लिए नियमित दालचीन वाले दूध में शहद को मिलाकर पीएं। इस दूध में कैंसर रोधी गुण होते हैं।

दालचीनी से बना दूध गले की मुख्य समस्याओं जैसे गले का दर्द व गले में खराश बने रहना आदि को आसानी से खत्म कर देता है।

चेहरे की दाग धब्बों की समस्या व बालों का कमजोर होना शरीर की कमजोरी की वजह व पोषण की कमी की वजह से होता है। जब आप दालचीनी वाला दूध पीते हैं तब यह दूध शरीर के अंदर जाकर काम करता है और आपके चेहरे और बालों से जुड़ी हुई हर समस्या को ठीक कर देता है।

टाइप -2 डायबिटीज से परेशान लोगों को दालचीन से बना दूध का सेवन करना चाहिए। दालचीनी वाला दूध ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। और यह आपको डायबिटीज की बीमारी में फायदा देता है।
कई बार यह समस्या हो जाती है कि खाना शरीर में पचता नहीं है जिस वजह से गैस व एसिडिटी बढ़ने लग जाती है। इसके अलावा अपच आदि भी होने लगती है। दालचीनी से बना हुआ दूध आपकी ये सारी समस्याएं पल भर में खत्म कर सकता है।

रात को सोने से पहले आप एक कप दालचीनी वाला दूध का सेवन करें। आपको इससे बहुत ही अच्छी नींद आएगी। और आपकी अनिंद्रा की समस्या भी ठीक हो जाएगी।

दालचीनी वाला दूध तभी आपको फायदे देता है जब आप इसका सेवन नियमित करते हैं। यह दूध पूरी तरह से आयुवेर्दिक है जिससे आपको किसी भी तरह का विपरीत प्रभाव नही पड़ेगा।

सर दर्द ,रुसी और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय


सर दर्द ,रुसी और बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय 

सर दर्द से राहत के लिए 
१. तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर पीने से सर दर्द में अत्यधिक लाभ होता है.

२ .नारियल पानी में या चावल धुले पानी में सौंठ पावडर का लेप बनाकर उसे सर पर लेप करने भी सर दर्द में आराम पहुंचेगा.

३. सफ़ेद चन्दन पावडर को चावल धुले पानी में घिसकर उसका लेप लगाने से भी फायेदा होगा.

४. सफ़ेद सूती का कपडा पानी में भिगोकर माथे पर रखने से भी आराम मिलता है.

५. लहसुन पानी में पीसकर उसका लेप भी सर दर्द में आरामदायक होता है.

६. लाल तुलसी के पत्तों को कुचल कर उसका रस दिन में माथे पर २ , ३ बार लगाने से भी दर्द में राहत देगा.

७. चावल धुले पानी में जायेफल घिसकर उसका लेप लगाने से भी सर दर्द में आराम देगा.

८. हरा धनिया कुचलकर उसका लेप लगाने से भी बहुत आराम मिलेगा.

९ .सफ़ेद  सूती कपडे को सिरके में भिगोकर माथे पर रखने से भी दर्द में राहत मिलेगी.

 बालों की रूसी दूर करने के लिए
१. नारियल के तेल में निम्बू का रस पकाकर रोजाना सर की मालिश करें.

२. पानी में भीगी मूंग को पीसकर नहाते समय शेम्पू की जगह प्रयोग करें.

३. मूंग पावडर में दही मिक्स करके सर पर एक घंटा लगाकर धो दें.

४ रीठा पानी में मसलकर उससे सर धोएं.

५. मछली, मीट अर्थात nonveg त्यागकर केवल पूर्ण शाकाहारी भोजन का प्रयोग भी आपकी सर की रूसी दूर करने में सहायक होगा.

गैस व् बदहजमी दूर करने के लिए
१. भोजन हमेशा समय पर करें.

२. प्रतिदिन सुबह देसी शहद में निम्बू रस मिलाकर चाट लें.

३. हींग, लहसुन, चद गुप्पा ये तीनो बूटियाँ पीसकर गोली बनाकर छाँव में सुखा लें, व् प्रतिदिन एक गोली खाएं.

४. भोजन के समय सादे पानी के बजाये अजवायन का उबला पानी प्रयोग करें.

५. लहसुन, जीरा १० ग्राम घी में भुनकर भोजन से पहले खाएं.

६. सौंठ पावडर शहद ये गर्म पानी से खाएं.

७. लौंग का उबला पानी रोजाना पियें.

८. जीरा, सौंफ, अजवायन इनको सुखाकर पावडर बना लें,शहद के साथ भोजन से पहले प्रयोग करें.

पुदीना का तेल के चमत्कारी लाभ, health Benefits of Mint Oil


पुदीने के तेल मेंमेंथोन मेंथॉल और मेंथाइल एस्टर् होते हैं, जिनकी वजह से इसके गुणों की फेहरिस्त काफी लम्बी है। इस तेल का प्रयोग कई उत्पादों, जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट,चाय, आइसक्रीम, च्युइंग गम आदि के निर्माण में भी किया जाता है।

पर दूसरी तरफ इसके हमारे शरीर पर होने वाले उपकार भी कई हैं। काफी पुराने समय से पुदीना अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है और तभी से इसका प्रयोग काफी बड़ी तादाद में किया जाता रहा है।

इसे विश्व की सबसे पुरानी औषधि भी कहा जाता है। पुदीने तेल के लाभ पर विशेष जानकारी ।


हाज़मे की समस्या से मुक्ति 
यह तेल हाज़मे की समस्या के लिए काफी बेहतरीन औषधि है। अगर आपने भोजन थोड़ा ज़्यादा कर लिया है, तो एक गिलास में इस तेल की कुछ बूँदें डालें और इसे पी लें। यह गैस की समस्या को प्रभावी रूप से दूर करने में सक्षम है। इसके बिलकुल उलट गुण के अंतर्गत यह आपके भूख न लगने की समस्या का भी बेहतरीन इलाज है। यह दस्त, मतली, पेट में अन्य प्रकार की गड़बड़ी आदि समस्याओं को ठीक करने में सक्षम है। एक शोध के अनुसार ब्लेंडेड पेपरमिंट तथा कैरवै के तेल से सीने में जलन की समस्या से भी निजात मिलती है।

दांतों की देखभाल 
पुदीने के तेल में एंटी सेप्टिक (Antiseptic) गुण होते हैं और यह साँसों की बदबू को दूर करता है। यह आपके दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ बनाता है तथा कीटाणुओं से लड़ता है। पुदीने के तेल को कई टूथपेस्ट्स में भी मिश्रित किया जाता है। यह दांतों के दर्द को दूर करने तथा इन्हेलेशन की समस्या का भी प्रभावी उपचार है।

नाखूनों की देखभाल
पुदीने के तेल में एंटी फंगल गुण भी होते हैं, जो आपके नाखूनों को फंगल इन्फेक्शन से बचाते हैं। ये नाखूनों को काफी स्वस्थ रखते हैं तथा इन्हें टूटने से भी बचाते हैं।

सिर का दर्द दूर करता हैं
सिर में दर्द की समस्या को दूर करने के लिए पुदीने का तेल काफी प्रभावी उपचार होता है। इस तेल को लें तथा इसमें पानी मिलाकर इसे डाइल्यूट कर लें। इसे अपने सिर पर लगाएं तथा अच्छे से मालिश करें। यह न सिर्फ दर्द को दूर करता है, बल्कि सिर के उस भाग को सुकून भी प्रदान करता है।

तनाव।  
ज़्यादातर एसेंशियल ऑयल्स जिनमें से एक पुदीने का तेल भी है, आपको डिप्रेशन, चिंता और थकावट से मुक्ति दिलाते हैं। यह तेल आपमें ऊर्जा का संचार करता है और आपके मन में चल रही बेचैनी की भावना को भी दूर करता है। इस तेल से आपका मस्तिष्क काफी अच्छे से चलता है, क्योंकि यह आपके दिमाग में चल रही दुश्चिंताओं को हटाता है और आपको ध्यान लगाने में सहायता करता है।

सांस की समस्या 
मेंथॉल से आपकी साँसों की तकलीफ काफी प्रभावी रूप से दूर होती है। यह एक उपयोगी एक्सपेक्टोरेन्ट  है, जिसकी वजह से यह आपको तुरंत राहत प्रदान करता है। जिन सामान्य समस्याओं से आप इसकी मदद से निपट सकते हैं, उनमें मुख्य है नाक का बंद होना, साइनसाइटिस, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, ठण्ड और कफ। अतः अब से जब भी आपको ठण्ड लगे, तो थोड़ा सा पुदीने का तेल अपनी छाती पर लगा लें। इससे आपकी स्थिति सुधरेगी और आपके शरीर को काफी सुकून मिलेगा।

दर्द से छुटकारा 
इस तेल के प्रयोग से आप दर्द से भी छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। शोध से यह साबित हुआ है कि पुदीने का तेल दर्द से प्रभावित भागों को ठीक करने में सक्षम है। इसमें शरीर को ठंडक प्रदान करने के भी गुण होते हैं, जिससे बुखार कम करने में काफी मदद मिलती है। कई लोग इसका रेफ्रिजरेन्ट के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह चोट और घाव की स्थिति में प्रभावित भाग को राहत पहुंचाता है। आप इस तेल का प्रयोग सूजन, दर्द तथा जलन दूर करने के लिए भी कर सकते हैं।

प्रतिरोधी तंत्र 
आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा खुद को कई बीमारियों से प्रभावित होने से बचाने के लिए पुदीने के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे कई तरह की बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। इसमें एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण हमारी प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करने वाली कई बीमारियों का पुख्ता तरीके से इलाज करते हैं।

रक्त का संचार 
आप पुदीने के तेल की मदद से रक्त संचार भी बढ़ा सकते हैं। कई शोधों से साबित हुआ है कि एसेंशियल वेपर हमारी ओल्फैक्टरी नसों को छूते हैं और इससे हमारे पल्स रेटमें तेज़ी आती है। इसकी मदद से मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को भी कई समस्याओं से बचाया जा सकता है।

>>मधुमेह का सबसे अच्छा होमियोपैथिक इलाज, 
>>कैसे अपने बच्चे की अंगूठा चूसने की आदत छुड़वायें?

मॉनसून के सीजन में आंखें लाल मतलब कंजंक्टिवाइटिस का खतरा, Ayurvedic treatment of conjunctivitis


यह आंख के ग्लोब के ऊपर (बीच के कॉर्निया क्षेत्र को छोड़कर) एक महीन झिल्ली चढ़ी होती है जिसे कंजंक्टिवा कहते है।

कंजंक्टिवा में किसी भी तरह के इंफेक्शन (बैक्टीरियल, वायरल, फंगल) या एलर्जी होने पर सूजन आ जाती है जिसे कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है।

कंजंक्टिवाइटिस बीमारी के लक्षण

- सुबह के वक्त आंख चिपकी मिलती है और कीचड़ आने लगता है तो यह बैक्टिरियल कंजंक्टिवाइटिस का लक्षण हो सकता है।

- अगर आंख लाल हो जाती है और उससे पानी गिरने लगता है, तो यह वायरल और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है।

- आंख में चुभन महसूस होती है, तेज रोशनी में चौंध लगती है, आंख में तेज खुजली होती है, तो यह एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस हो सकती है।

कंजंक्टिवाइटिस: लक्षण, बचाव और इलाज

कंजंक्टिवाइटिस से बचाव

- कंजंक्टिवाइटिस होने पर मरीज को अपनी आंख दिन में तीन-चार बार साफ पानी से धोनी चाहिए।

- कंजंक्टिवाइटिस अगर इंफेक्शन की वजह से है तो ऐसे शख्स से हाथ नही मिलाना चाहिए, नहीं तो इंफेक्शन हाथ के जरिए स्वस्थ व्यक्ति की आंख में भी हो सकता है।

- ऐसे शख्स का तौलिया या रुमाल भी इस्तेमाल नही करना चाहिए। बरसात के मौसम में स्विमिंग पूल में नहीं जाना चाहिए वरना कंजंक्टिवाइटिस इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने का खतरा रहता है।

- गर्मी के मौसम में अच्छी क्वॉलिटी का धूप का चश्मा पहनना चाहिए। चश्मा आंख को तेज धूप, धूल और गंदगी से बचाता है, जो एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के कारण होते हैं।

कंजंक्टिवाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज

- कंजंक्टिवाइटिस में स्टेरॉयड वाली दवा जैसे डेक्सामिथासोन (Dexamethasone), बीटामिथासोन (Betamethasone) आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अगर जरूरी है, तो सिर्फ डॉक्टर की सलाह से ही आई-ड्रॉप्स डालें और उतने ही दिन जितने दिन आपके डॉक्टर कहें। स्टेरॉयड वाली दवा के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों को काफी नुकसान हो सकता है।

ये सभी दवाएं जेनरिक हैं। दवाएं बाजार में अलग-अलग ब्रैंड नामों से उपलब्ध हैं।

बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और इस दौरान सबसे ज्यादा जो बीमारी लोगों को परेशान करती है वह है आई इंफेक्शन कंजंक्टिवाइटिस । ऐसे में यह सवाल भी लोगों के जेहन में है कि क्या ऐंटीबायॉटिक आई ड्रॉप्स कंजंक्टिवाइटिस के इलाज में कारगर है? इस बारे में हुई रिसर्च की मानें तो आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल नुकसानदेह साबित हो सकता है।


इंटरनैशनल जर्नल ऑप्थैलमॉलजी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत कंजंक्टिवाइटिस इंफेक्शन वायरस की वजह से होता है और इसके इलाज में ऐंटीबायॉटिक का कोई रोल नहीं होता। कंजंक्टिवाइटिस एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें कंजंक्टिवा- जो आंखों के आगे की सतह में पाई जाने वाली बेहद महीन झिल्ली होती है उसमें जलन और लालीपन आ जाता है और इस वजह से आंखें खुद को सेल्फ लिमिट कर लेती हैं। मॉनसून के सीजन में कंजंक्टिवाइटिस होना सामान्य बात है क्योंकि इस दौरान नमी बहुत ज्यादा रहती है जो बैक्टीरिया और वायरस के ग्रोथ में सहायता करती है।

एम्स के आर पी आई सेंटर के हेड और प्रफेसर डॉक्टर अतुल कुमार कहते हैं, 'ऐंटीबायॉटिक्स पहले इसलिए प्रिस्क्राइब की जाती थीं ताकि कॉर्निया को किसी तरह का सेकंडरी इंफेक्शन न हो। भारत में बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से अमेरिका की तुलना में ज्यादा कंजंक्टिवाइटिस के केस देखने को मिलते हैं। कई मौको पर ऐंटीबायॉटिक्स देना जरूरी होता है। लेकिन इनके बहुत अधिक इस्तेमाल से बचना चाहिए अन्यथा आंखों की सतह को नुकसान पहुंच सकता है।'
सेंटर फॉर साइट के चेयरमैन और मेडिकल डायरेक्टर डॉ महिपाल सचदेव कहते हैं, 'कई बार कंजंक्टिवाइटिस से बचाव के लिए भी ऐंटीबायॉटिक्स प्रिस्क्राइब की जाती हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से कंजंक्टिवाइटिस होने का चांस बेहद कम होता है। ज्यादातर केस में इसके लिए वायरस ही जिम्मेदार होते हैं। लेकिन डॉक्टर्स किसी तरह का चांस नहीं लेना चाहते क्योंकि अगर किसी भी वजह से इंफेक्शन और बढ़ता है तो मरीज उन्हें लापरवाही बरतने के लिए जिम्मेदार ठहराएंगे।'

अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर ऑप्थैलमॉलजी कंसल्टेंट डॉ रंजना मित्तल कहती हैं, 'प्रैक्टिकली यह जांच करवाना संभव नहीं है कि कंजंक्टिवाइटिस का इंफेक्शन वायरस की वजह से है या बैक्टीरिया की वजह से। इसलिए प्रिकॉशन के तौर पर डॉक्टर्स माइल्ड ऐंटीबायॉटिक्स प्रिस्क्राइब कर देते हैं।' वायरस की वजह से होने वाला कंजंक्टिवाइटिस अपने आप ही एक सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है लेकिन डॉक्टर्स कहते हैं कि बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होने वाला कंजंक्टिवाइटिस कई केस में कॉर्निया तक फैल जाता है। कॉर्निया में इंफेक्शन और घाव आंखों को स्थायी तौर पर नुकसान पहुंचा सकता है।